चंडीगढ़ में स्कूलों के बाहर चाकूबाजी की घटनाएं बढ़ गई हैं। मामूली बात पर भी चाकूबाजी की घटनाएं हो रहीं हैं। कुछ दिन पहले ही मलोया स्मॉल फ्लैट में स्कूल के गेट पर एक छात्र के मुंह पर कुछ युवकों ने चाकू से हमला कर दिया था। हमले में छात्र गंभीर रूप से घायल हुआ था। इससे पहले सेक्टर-18 में प्रिंसिपल पर छात्र ने हमला कर दिया था, जिसमें प्रिंसिपल को सिर पर गहरी चोट आई थी।
परीक्षा खत्म होने के बाद बुधवार को चंडीगढ़ सेक्टर-39 के एक पार्क में कुछ छात्र होली खेल रहे थे। इस बीच नौवीं कक्षा के छात्र का कुछ लड़कों से झगड़ा हो गया। झगड़े के बीच एक लड़के ने चाकू निकालकर नौवीं के छात्र पर हमला कर दिया।
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चाकू लगने से छात्र लहूलुहान हो गया। इसके बाद आरोपी मौके से भाग निकले। घायल छात्र को जीएमएसएच-16 में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। मामले में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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वारदात बुधवार दोपहर की बताई जा रही है। सेक्टर-39 के पार्क में जब छात्र होली खेल रहे थे, तब वहां पर मौजूद एक महिला वीडियो बना रही थी। इसी बीच वारदात हो गई। महिला ने वारदात का वीडियो भी अपने फोन में कैद कर लिया। वीडियो में हमलावर छात्र हमला करने के बाद गाली देते हुए दो अन्य युवकों के साथ बाइक पर भागता नजर आ रहा है। सूचना पर सेक्टर-39 थाना पुलिस के साथ फोरेंसिक टीम भी पहुंची। पुलिस टीम ने बाकी बच्चों और लोगों के बयान दर्ज किए। साथ ही वारदात स्थल का मुआयना किया है। पुलिस की टीम सामने आए वीडियो के आधार पर फरार छात्रों की तलाश में जुटी है। बताया जा रहा है कि आरोपी भी स्कूली छात्र हैं और चाकू मारने वाला नाबालिग है।
स्कूलों के बाहर नहीं होती पुलिस, कई बार उठ चुकी मांग
पिछले काफी समय से रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, पार्षद से लेकर तमाम लोग स्कूलों के बाहर पीसीआर तैनात करने की मांग करते आए हैं। कुछ वर्ष पहले जब प्रशासक के सलाहकार और पार्षदों की आमने-सामने बैठक हुई थी, उसमें भी कई पार्षदों ने इस बात को दोहराया था। कहा था कि स्कूलों में छुट्टी के समय पीसीआर खड़ी होनी चाहिए क्योंकि मारपीट या चाकूबाजी की अधिकतर घटनाएं स्कूलों में छुट्टी के दौरान ही होती हैं। इसी दौरान छात्र आपस में भिड़ जाते हैं। अगर मौके पर पुलिस की गाड़ी तैनात रहेगी तो ऐसी घटनाओं में काफी कमी आ सकती है। पुलिस हर बार ऐसा करने की आश्वासन देती है लेकिन अधिकतर स्कूलों के बाहर पुलिस की गाड़ी नहीं होती। पार्षदों ने यह भी सुझाव दिया था कि पुलिस ऐसे स्कूलों की पहचान कर सकती है, जहां पर अक्सर लड़ाई झगड़े होते हैं और फिर उनके बाहर गाड़ी तैनात की जा सकती है।