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Chandigarh News: विद्यार्थी प्रदर्शन हमारा मौलिक अधिकार है, हम क्रिमिनल माइंडेड नहीं हैं

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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में विरोध-प्रदर्शन के लिए अनुमति लेने को लेकर विद्यार्थियों से एक एफिडेविट भरवाया जा रहा है। इसको लेकर विद्यार्थियों में गुस्सा है। मंगलवार को अमर उजाला कार्यालय में इस मुद्दे पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें पीयू के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। सभी ने एफिडेविट के संबंध में अपने-अपने विचार रखे। उन्होंने साफ किया है कि यदि यूनिवर्सिटी इसे वापस नहीं लेती तो वह किसी भी हद तक जाएंगे। जरूरत पड़ी तो यूनिवर्सिटी बंद भी करेंगे।
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यह डेमोक्रेसी पर हमला, केंद्र से मिल रहे आदेश
सीनेट बॉडी विद्यार्थियों की बात को अथॉरिटी तक पहुंचाती थी। सीनेट के अधीन ही 24 घंटे हॉस्टल की सुविधा हुई। लेकिन सीनेट को खत्म कर दिया गया। अब विद्यार्थियों की बोलने की आजादी को खत्म किया जा रहा है। यूनिवर्सिटी विद्यार्थियों को संगठित करने वाले लीडर को दबाना चाहती है। यह डेमोक्रेसी पर हमला है। वीसी और डीन अकादमी की सीट पॉलिटिकल सीट है एकेडमिक नहीं। वीसी को यह सब करने के लिए केंद्र की ओर से कहा जा रहा है।-सुखमन, पंजाबनामा


विद्यार्थियों को क्रिमिनल माइंडेड बता रही अथॉरिटी
सीनेट को लेकर जब धरना हुआ था तब उन्हें एफिडेविट भरने के लिए बोला गया, लेकिन विद्यार्थियों ने एफिडेविट भरने से मना कर दिया। इसके बाद 12 विद्यार्थियों पर एफआईआर दर्ज की गई। जब विद्यार्थियों ने एफिडेविट को नकारा उसके बाद ही इसे हैंडबुक में डालकर लागू करने की कोशिश की गई। यूनिवर्सिटी विद्यार्थियों को क्रिमिनल माइंडेड बताती है। यदि फीस बढ़ती है या हॉस्टल में विद्यार्थियों को दिक्कत आती है तो वह अपनी आवाज कैसे उठाएंगे। -करणवीर, एसएफएस
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यूनिवर्सिटी विद्यार्थियों की आजादी को छीनने और कंट्रोल करने की कोशिश कर रही है। इस तरह का एफिडेविट भरवाना विद्यार्थियों का अधिकार छीनना है। यह अघोषित इमरजेंसी है। कोई अपनी मर्जी से धरना नहीं लगाना चाहता। विद्यार्थी सुविधाओं और गलत के खिलाफ इसलिए आवाज उठाते हैं। यदि वह अपने अधिकारों के लिए नहीं बोलेंगे तो क्या यूनिवर्सिटी उन्हें उनके अधिकार दे देगी। ।-आकांक्षा ठाकुर, पंजाब यूनिवर्सिटी


प्रदर्शन करना विद्यार्थियों का मौलिक अधिकार
यदि यूनिवर्सिटी सारी सुविधाएं भी दे तब भी प्रदर्शन करना विद्यार्थियों का मौलिक अधिकार है। विद्यार्थियों की आवाज को इसीलिए दबाने की कोशिश की जा रही है ताकि वह मणिपुर, लद्दाख, गाजा और अन्य जगह पर हो रहे कत्लेआम के साथ अपने अधिकारों पर आवाज न उठा सकें। क्योंकि यूनिवर्सिटी में आकर विद्यार्थी गलत और सही की पहचान करना सीखते हैं। -संदीप एसएफएस


तानाशाही रवैया अपना रही यूनिवर्सिटी
यूनिवर्सिटी तानाशाही रवैया अपना रही है। विद्यार्थियों को प्रदर्शन आइसोलेशन में करने की सलाह दी जा रही है। यदि विद्यार्थी प्रदर्शन करते हैं तो अथॉरिटी अपने कमरों से बाहर नहीं आती, उन्हें टेंट लगाने नहीं दिए जाते, पूरा दिन विद्यार्थियों को धूप में बैठने के लिए मजबूर किया जाता है। ऐसे में विद्यार्थी निराश होते हैं हर साल विश्व में बढ़ोतरी हो रही है तो विद्यार्थी अपनी आवाज कैसे उठाएंगे। -अरमान सिंह, आईसा


एनईपी में भी प्रदर्शन न करने की शर्तें शामिल
यह एफिडेविट गैर संवैधानिक है। न्यू एजुकेशन पॉलिसी में भी प्रदर्शन न करने की शर्तें शामिल हैं। इसका असर गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में भी देखने को मिलता है। वहां पर विद्यार्थियों को अपनी आवाज और अपनी बात रखने का अधिकारी नहीं है। एकमात्र पंजाब यूनिवर्सिटी है जिसमें विद्यार्थी अपनी बात उठाते हैं। अब उनकी भी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। -नोबल जीत सिंह, पीयू


एचओडी विद्यार्थियों से भरवा रहे एफिडेविट
यह मामला कोर्ट में भी चल रहा है जहां पर यूनिवर्सिटी अथॉरिटी की ओर से विद्यार्थियों को क्रिमिनल माइंडेड बताया गया है। विभागों के एचओडी विद्यार्थियों को यह एफिडेविट भरने के लिए कह रहे हैं। नए विद्यार्थी यूनिवर्सिटी में आकर ही अपनी समझ को विकसित करते हैं। यहीं आकर उन्हें पता चलता है कि क्या गलत है और क्या सही। यूनिवर्सिटी उनको पहले ही दबाना चाहती है ताकि वह आगे चलकर अपनी आवाज ना उठा सके।-वरिंदर सिंह, पीयू


आदित्य ठाकुर की हत्या पीयू प्रशासन की सबसे बड़ी असफलता
यह एफिडेविट सीनेट की परमिशन के बिना आया है। यूनिवर्सिटी में एडमिशन फॉर्म के साथ ही इस एफिडेविट को भरवाने की कोशिश की है। ताकि नए विद्यार्थी आगे जाकर प्रश्न ही न कर पाए। कोई भी प्रदर्शन करने के लिए विजिबिलिटी और इंपैक्ट दोनों होने चाहिए, लेकिन जो जगह यूनिवर्सिटी दे रही है वह बिल्कुल आउट में है। अगर प्रदर्शन में आउटसाइड दर आते हैं तो उसकी जिम्मेदारी भी यूनिवर्सिटी नहीं लेती। आदित्य ठाकुर की हत्या पीयू प्रशासन की सबसे बड़ी असफलता है। -दीक्षा, पीयू


यूनिवर्सिटी में अकादमिक कल्चर हो रहा खत्म
विद्यार्थी लोकतंत्र की जड़ है इसीलिए उन पर ही इसे लागू करके नियंत्रित करने की कोशिश की गई है। यूनिवर्सिटी के पूर्व विद्यार्थियों ने इतनी लंबी लड़ाई लड़ी। विद्यार्थियों को पुलिस केस झेलने पड़े लेकिन उन्होंने गलत को यूनिवर्सिटी में बर्दाश्त नहीं होने दिया। यूनिवर्सिटी में अकादमिक कल्चर खत्म हो रहा है। यदि कोई विद्यार्थी ह्यूमन राइट विभाग से है तो उसे प्रैक्टिस करने से कैसे रोका जा सकता है। हम किसी भी हालत में पीछे नहीं हटेंगे। -हरपुनीत कौर, पीयू


लोकतंत्र की पहली पाठशाला है यूनिवर्सिटी
पीयू में तानाशाही चल रही है। इसका सीधा असर पहले वर्ष के विद्यार्थियों पर होगा, ताकि वह कोई भी डिस्कशन में हिस्सा न ले और न अपने अधिकारों के लिए लड़े और न अपने लिए आवाज बुलंद कर सकें। यूनिवर्सिटी लोकतंत्र की पहली पाठशाला है। प्रशासन को जवाबदेह स्टूडेंट ही बनाते हैं। आज अथॉरिटी उनसे मिलने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में यदि विरोध प्रदर्शन का अधिकार खत्म हो जाएगा तो अथॉरिटी बिल्कुल लापरवाह हो जाएगी। -पंकज, पीयू
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