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Stubble Burning in Punjab: केंद्र-राज्य में खींचतान का असर... सांसों में जहर घोल रही जलती पराली

Mon, 21 Oct 2024 02:37 PM IST
निवेदिता वर्मा राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

एनजीटी ने पंजाब सरकार से पराली जलाने पर पिछले साल की गई कार्रवाई के संबंध में रिपोर्ट तलब की थी। राज्य सरकार ने अब एनजीटी में अपनी रिपोर्ट सबमिट कर दी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पराली के प्रबंधन के लिए 1125 करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी करने की उनकी मांग केंद्र ने नहीं मानी है।
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पंजाब में जलने लगी पराली - फोटो : ANI/File
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विस्तार
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पंजाब में पराली जलाने के केसों में दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी होती जा रही है। पंजाब सरकार के तमाम दावों के बावजूद इस पर रोक नहीं लग रही है। दरअसल केंद्र व राज्यों के आपसी खींचातान के चलते जलती पराली उत्तर भारत में लोगों की सांसों में जहर घोल रही है। 
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पंजाब सरकार आरोप लगाती रही है कि पराली जलाने के मामलों पर रोक लगाने के लिए उसे केंद्र से सहयोग नहीं मिल रहा है, जबकि केंद्र पहले ही साफ कर चुका है कि अलग-अलग योजनाओं के तहत पराली प्रबंधन के लिए राज्यों को उचित फंड दिया जा रहा है। हाल ही में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी पराली जलने के मामलों पर अपनी चिंता जाहिर की थी।

एनजीटी ने पंजाब सरकार से पराली जलाने पर पिछले साल की गई कार्रवाई के संबंध में रिपोर्ट तलब की थी। राज्य सरकार ने अब एनजीटी में अपनी रिपोर्ट सबमिट कर दी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पराली के प्रबंधन के लिए 1125 करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी करने की उनकी मांग केंद्र ने नहीं मानी है। पराली प्रबंधन के लिए किसानों को मुआवजा देने से राज्य पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

क्या है रिपोर्ट में

रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में 30 लाख हेक्टेयर एरिया में धान की बुआई होती है, जिससे 187 लाख मीट्रिक टन के करीब पराली निकलती है। 49 प्रतिशत पराली का इन सीटू व एक्स सीटू के जरिए प्रबंधन किया जा रहा है। इन सीटू में मशीनों के जरिये खेतों के अंदर, जबकि एक्स सीटू में पराली को लिफ्ट करके प्लांट में इसका निस्तारण किया जाता है। बाकी बची 51 प्रतिशत पराली को किसान आगे के हवाले कर रहे हैं। 
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अगर 49 प्रतिशत पराली का प्रबंधन हो सकता है तो 100 प्रतिशत करना भी कुछ ज्यादा मुश्किल नहीं है। लेकिन इसके लिए किसानों को 2500 रुपये प्रति एकड़ फसल अवशेष प्रबंधन इंसेंटिव देने की जरूरत है। 30 लाख हेक्टेयर के हिसाब से सीजन के लिए कुल मुआवजा राशि 1875 करोड़ रुपये बनती है। दिल्ली एनसीआर भी इससे बुरी तरह से प्रभावित है तो इस राशि का खर्च पंजाब, केंद्र व दिल्ली सरकार को वहन चाहिए। केंद्र की तरफ से 1125 करोड़ रुपये जबकि पंजाब व दिल्ली को प्रति 375 करोड़ रुपये की राशि जारी की जानी चाहिए। केंद्र, दिल्ली व पंजाब सरकार को इस पर मिलकर काम करने की जरूरत है। हालांकि केंद्र की तरफ से इस मांग को नहीं माना गया है।

पंजाब सरकार ने खरीफ सीजन के लिए 500 करोड़ रुपये का एक्शन प्लान तैयार किया था, जिसके लिए 150 करोड़ रुपये केंद्र सरकार की तरफ से जारी की गई थी। केंद्र की तरफ से जवाब दिया गया था कि अगर किसानों को सही रूप से जागरूक करने का काम किया जाएगा तो पराली प्रबंधन के लिए अतिरिक्त राशि की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रदेश में हालत ये है कि पराली जलाने के मामले 1393 तक पहुंच गए हैं। पहले सिर्फ अमृतसर व तरनतारन में ही पराली जलाने के अधिक मामले सामने आ रहे थे, लेकिन अब पटियाला में भी पराली जलाने के मामलों ने रफ्तार पकड़ना शुरू कर दिया है।

8 हजार नोडल अधिक रख रहे नजर: खुड्डियां

कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि 8 हजार नोडल अधिकारी पराली जलाने के मामलों पर नजर रख रहे हैं। सरकार काफी हद तक पराली प्रबंधन में सफल भी हुई है, क्योंकि पहले से अब कम मामले आ रहे हैं। ये अधिकारी विशेषकर उन क्षेत्रों पर नजर रख रहे हैं, जहां पर पराली जलाने के अधिक मामले सामने आ रहे हैं। अधिकारी किसानों को जागरूक करने का काम भी कर रहे हैं, ताकि पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाई जा सकें।

केंद्र सरकार की तरफ से आप सरकार को पराली प्रबंधन के लिए उचित फंड किया जा रहा है, लेकिन आप सरकार हर फंड का उपयोग दूसरे कार्यों में करती रहती है और बेवजह केंद्र को कोसती रहती है। पराली का प्रबंधन करने में सूबा सरकार खुद असफल रही है और इसका ठीकरा दूसरों पर फोड़ने में लगी हुई है। - अश्वनी शर्मा, पूर्व प्रधान, पंजाब भाजपा।

पराली के प्रबंधन के लिए समय रहते प्रयास करने चाहिए। हर साल ही खरीफ सीजन शुरू होने से पहले पराली के प्रबंधन पर जोर दिया जाता है। सरकार के पास फंड की कमी नहीं है, लेकिन उसके सही उपयोग की कमी है। अगर समय पर किसानों को पराली की प्रबंधन की मशीनें उपलब्ध करवाई जाएंगी और जागरूक किया जाएगा तो हर साल खरीफ सीजन में यह नौबत नहीं आएगी। -प्रोफेसर सुमीत, कृषि विशेषज्ञ।
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