पीजीआई में शुक्रवार को पहले से शेड्यूल 150 से अधिक ऑपरेशन कैंसिल कर दिए गए हैं। पीजीआई डायरेक्टर ने ट्राइसिटी के लोगों को भी इलाज के लिए पीजीआई नहीं आने का आग्रह किया है।
पीजीआई में शुक्रवार का दिन भी भर्ती मरीजों और उनके तमीरदारों के लिए मुश्किल भरा होगा। मरीजों की देखरेख के लिए जरुरी नर्स स्टॉफ नहीं मिल पाएगा। 24 घंटे तक पूरे पीजीआई में नर्से ड्यूटी नहीं करेंगी। 26 फरवरी को ऑल इंडिया नर्सेज फेडरेशन ने मांगे नहीं माने जाने के विरोध में एक दिन का सामूहिक अवकाश लेने का फैसला लिया है।
पीजीआई में 2 हजार से अधिक नर्सें सामूहिक अवकाश पर होंगी। ऐसे में पीजीआई में मरीजों की देखरेख और ऑपरेशन का काम बुरी तरह प्रभावित होगा। पीजीआई ओपीडी में हर रोज सैंकड़ों की संख्या में मरीज आते हैं।
पीजीआई नर्सिंग वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान लखविंदर सिंह ने कहा कि उन्हें मजबूर होकर सामूहिक अवकाश का फैसला लेना पड़ा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने नर्सो को 5400 पे ग्रेड, रिस्क अलाउंस, नॉन प्रैक्टिस अलाउंस सहित कई अन्य मांगों को लेकर कोई कदम नहीं उठाया है।
उन्होंन बताया कि 24 घंटे तक पीजीआई में नर्सें छुट्टी पर रहेंगी। शुक्रवार सुबह 8 बजे पीजीआई स्थित निवेदिता नर्सिंग हॉस्टल में सभी नर्सें इक्ट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन करेंगी। उधर, पीजीआई नर्र्सों के सामूहिक अवकाश का सेक्टर-16 सरकारी अस्पताल और जीएमसीएच-32 की नर्सों ने भी समर्थन देने का फैसला लिया है,लेकिन यहां नर्से ड्यूटी पर रहेंगी।
लखविंदर के अनुसार 16 सरकारी अस्पताल की 500 नर्स काले बिल्ले लगाकर और जीएमसीएच-32 की 700 नर्से गेट रैली निकालकर समर्थन देंगी।
पीजीआई ने पड़ोसी राज्य को लिखा, मरीज नहीं भेजें
पीजीआई प्रशासन की ओर से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल सहित अन्य राज्यों के हेल्थ विभाग को नर्सो के सामूहिक अवकाश का हवाला देते हुए मरीजों को पीजीआई रेफर नहीं करने की चिट्ठी लिखी गई है। पीयू अधिकारियों के अनुसार इमरजेंसी और ट्रामा सेंटर में नर्सिंग स्टूडेंट्स की सेवाएं ली जाएंगी। उधर, पीजीआई प्रशासन ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए इंतजाम कर लिए हैं।