इसके चलते यहां भी ओपीडी में अव्यवस्था का आलम बना रहा। आईएमए के आह्वान पर हड़ताल को हालांकि पीजीआई और जीएमएसएच के रेजीडेंट्स डॉक्टरों ने समर्थन दिया है, पर उन्होंने ओपीडी सेवाएं बाधित नहीं कीं लेकिन सेक्टर-32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के मेडिकल स्टूडेंट्स ने हड़ताल का समर्थन करते हुए ओपीडी में काम नहीं किया। फिलहाल डॉक्टरों का कहना है कि इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित नहीं की गई हैं लेकिन जनता और डॉक्टरों के हित में अगर ये भी करना पड़ा तो किया जाएगा।
एक दिवसीय हड़ताल का असर लुधियाना में भी देखने को मिला। हड़ताल के दौरान डॉक्टरों ने ओपीडी सेवाएं बंद रखकर नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के खिलाफ रोष जताया गया।
सिविल अस्पताल में भी डॉक्टरों ने दो घंटों तक हड़ताल जारी रखी। जिससे मरीज काफी परेशान नजर आए। गुरदासपुर में भी सिविल अस्पताल में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले डॉक्टरों ने दो घंटे रोष प्रदर्शन किया।
फाजिल्का में भी बुधवार सुबह 6 बजे से लेकर एक अगस्त सुबह 6 बजे तक ओपीडी ठप हैं। इस दौरान निजी अस्पतालों में तो ओपीडी पूरी तरह से बंद रही। जबकि सरकारी अस्पताल में ओपीडी सेवा जारी रही। उधर हड़ताल का पता न होने के कारण निजी अस्पतालों में पहुंचे मरीजों को भारी परेशानी हुई।
बठिंडा में हड़ताल का असर देखने को मिला। सरकारी एवं प्राइवेट डॉक्टरों ने एक सुर में बिल को रद्द करने की मांग रखी। पीसीएमएस के अध्यक्ष डॉ गुरमेल सिंह, डॉ अंकित कुमार, डॉ अरुण बंसल और डॉ रवि ने बताया कि उक्त बिल लोग एवं डॉक्टर विरोधी है। जिस कारण पूरे देश के डॉक्टर इस बिल का विरोध कर रहे है।