हरियाणा में जाट आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन के बीच बड़े पैमाने पर हुई उपद्रव की घटनाओं के बाद अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भी आम नागरिकों से सूबे में शांति कायम रखने की अपील की है। साथ ही राजनीतिक दलों और नेताओं का आह्वान किया है कि वह सियासी हित छोड़ प्रदेश के बिगड़े हालात को सामान्य बनाने पर एकजुट होकर विचार करें।
जस्टिस एसके मित्तल व एचएस सिद्धू की डिवीजन बेंच ने कहा है कि हरियाणा को हरियाणा ही रहने देना चाहिए। प्रदेश की संस्कृति में मौजूदा हालातों के लिए जगह नहीं है। यदि स्थिति ऐसी ही रही तो हरियाणा पचास साल पीछे चला जाएगा। भिवानी के मुरारी लाल गुप्ता ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर बिगडे़ हालातों पर काबू पाने का सरकार को निर्देश देने की मांग की थी।
इस पर हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया। साथ ही स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा गया था। सरकार ने कहा कि हालात पर काबू पाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उधर, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि सरकार ने समय रहते प्रयास नहीं किए, इसी कारण स्थिति बेकाबू हो गई।
बेंच ने कहा है कि सरकार आंदोलन के दौरान हुए नुकसान का आकलन कर पीड़ितों को तुरंत मुआवजे का इंतजाम करे, ताकि कारोबारी विकट स्थिति से उभर सकें।
सुनवाई 29 फरवरी तक स्थगित:
एडवोकेट जनरल बलदेव (एजी) राज महाजन ने बेंच को बताया कि अंतरिम राहत देनी शुरू की जा चुकी है। एजी ने बेंच को यह भी बताया कि ऐसी ही एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है। सीजेआई की खंडपीठ ने भी पहले स्थिति सामान्य बनाने की बात कही है। इन दलीलों के साथ एजी ने स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय प्रदान करने की मांग की। बेंच ने सुनवाई 29 फरवरी तक स्थगित कर दी है।