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एंटी रैबीज टीके: वीआईपी को मिल रहे और आम जनता खरीद रही, अस्पतालों ने खड़े किए हाथ

Tue, 04 Feb 2020 12:18 PM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा में कुत्तों के आतंक के साथ ही सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली भी आमजन के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। कुत्तों के काटने पर सिविल अस्पतालों में आम लोगों को सरकारी स्टॉक से एंटी रैबीज टीके नहीं लगाए जा रहे हैं। जबकि, हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड यानि एचएमएससीएल के पास 11355 एंटी रैबीज वैक्सीन मौजूद हैं। सरकारी विभागों में केवल वीआईपी को ही एंटी रैबीज टीके सरकारी स्टॉक से लगाए जाते हैं, इसकी पोल खुद सिविल अस्पतालों ने खोल दी है। ताजा वाकया रविवार का है।
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पंचकूला के सिविल अस्तपाल में पांच सौ एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध होने के बावजूद साढ़े तीन साल की मासूम को डॉक्टरों ने टीका नहीं लगाया। मासूम के परिजनों को टीका होने से मना कर दिया गया, जिस पर मेडिकल स्टोर से साढ़े तीन सौ रुपये में खरीदकर टीका लगवाना पड़ा। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों का स्टाफ, मरीजों और उनके परिजनों से कितना झूठ बोलता है, इसका भी खुलासा हो गया है। हरियाणा में एंटी रैबीज वैक्सीन कॉरपोरेशन के अंबाला, भिवानी, गुरुग्राम, हिसार, कैथल, करनाल व रोहतक वेयरहाउस में रखी हुई हैं।

सिविल सर्जन की डिमांड पर ये वैक्सीन उपलब्ध करवाई जाती हैं। जबकि, 149990 एंटी रैबीज वैक्सीन की खरीद पाइपलाइन में है। पंचकूला सिविल अस्पताल अंबाला वेयरहाउस से कवर होता है, जिसमें 35 हजार वैक्सीन और पहुंच रही हैं। 15 हजार पहुंच रही हैं, जबकि बीस हजार वैक्सनी एक-दो दिन में रिसीव होंगी। हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने माना की एंटी रैबीज वैक्सीन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर कमी चल रही है, लेकिन प्रदेश में जरूरी स्टॉक उपलब्ध है।
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मालूम रहे कि प्रदेश में हर साल कुत्तों के काटने के हजारों केस अस्पतालों में पहुंचते हैं। अकेले जिला पंचकूला में ही बीते साल पांच हजार केस रिपोर्ट हुए थे।
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मंत्री अनिल विज के गृह क्षेत्र में भी कर चुके मना

स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के गृह क्षेत्र अंबाला कैंट स्थित सिविल अस्पताल में भी मनमानी चल रही है। बीते महीने कुत्ते के काटने पर टिंबर मार्केट निवासी सुभाष चंद्र को सिविल अस्पताल के डॉक्टर सरकारी स्टाफ में एंटी रैबीज टीका होने से मना कर चुके हैं।

सुभाष को रात के समय कुत्ते ने काटा था, जब सिविल अस्पताल में टीका नहीं मिला तो मेडिकल स्टोर खुलवाकर परिजन को टीका खरीदकर लाना पड़ा था। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी अस्पतालों में हालात क्या हैं।

अतिरिक्त मुख्य सचिव के रिपोर्ट मांगने पर खुली पोल
स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने मामला संज्ञान में आने के बाद सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन खत्म होने की पड़ताल कराई। जिस पर हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड के डीजीएम आईटी, वेयरहाउस मैनेजमेंट एंड क्वालिटी कंट्रोल डॉ. सुमित मोर व डीजीएम उपकरण डॉ. परमवीर ने बताया कि जरूरी स्टॉक मौजूद है।

पंचकूला सिविल अस्पताल में भी पांच वैक्सीन स्टॉक में हैं। कारपोरेशन के एमडी ने भी सीएमओ से इस बारे में बातचीत की है। बावजूद इसके मासूम को सरकारी स्टॉक से टीका क्यों नहीं लगाया गया, इस पर अस्पताल प्रबंधन सवालों के घेरे में है। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने इस संबंध में रिपोर्ट मांग ली है।
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