मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से प्रशांत किशोर को अपना प्रमुख राजनीतिक सलाहकार बनाए जाने के बाद उन्होंने सूबे के कांग्रेस विधायकों की बैठक बुलाकर उनसे फीडबैक लिया। इसस कई विधायक नाराज हो गए थे। विधायकों का कहना था कि प्रशांत की ओर से उन्हें बुलाकर पूछताछ या जानकारी हासिल करना ऐसा साबित करता है कि प्रशांत अब कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ से भी बड़े हो गए हैं।
इसके बाद सामने आया कि प्रशांत किशोर ने करीब 30 विधायकों की सूची पार्टी आलाकमान को सौंपी है, जिनके बारे में सिफारिश की गई है कि इन विधायकों को 2022 में टिकट न दिया जाए। यह बात मीडिया में आते ही प्रदेश के कांग्रेस विधायकों का गुस्सा भड़क गया। हालांकि उनमें से किसी ने भी सार्वजनिक तौर पर इसका विरोध नहीं किया, लेकिन पार्टी के भीतर यह मामला इतने बड़े विवाद का विषय बन गया कि खुद कैप्टन को प्रशांत किशोर के बचाव में आगे आना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रशांत केवल सलाहकार हैं और वे सलाह ही दे सकते हैं। किसी को टिकट देना या नहीं देना, यह प्रशांत तय नहीं करेंगे, बल्कि कांग्रेस हाईकमान की ओर से तय विधि से ही उम्मीदवार तय किए जाएंगे।