पहली लापरवाही : बिना कोरोना जांच के छह दिन तक रखा कोविड मरीजों के साथ
जीरकपुर निवासी महेश बाबू वर्मा ने बताया कि 22 अप्रैल की शाम वे अपनी सास 62 वर्षीय गीता कुमारी को सांस फूलने की शिकायत पर पंचकूला सेक्टर-6 के जनरल अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर आया था। यहां डॉक्टरों ने जांच के बाद एक्सरे कराया, जिसमें सब कुछ सामान्य था। फिर डॉक्टरों ने सलाह दी कि सांस फूलना कोविड के लक्षण हैं, इनको आप कोविड वार्ड में लेकर जाओ। वहां से कोविड वार्ड में लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने बताया कि इनको ऑक्सीजन लगाते हैं, सेचुरेशन लेवल बढ़ जाएगा तो आप एक घंटे बाद उन्हें लेकर घर चले जाना। ऑक्सीजन का स्तर 67 से 80 तक पहुंच गया। इस पर डॉक्टर ने कहा, इनको कोविड वार्ड में ही दाखिल करवा देते हैं। महेश ने कहा कि आपने कोरोना जांच तो कराई नहीं, कोविड वार्ड में क्यों दाखिल कर रहे हैं। तो डॉक्टर ने जवाब दिया कि रात के साढ़े 10 बज गए हैं, अगले दिन सुबह करवा लेंगे। अगले दिन सुबह जब महेश ने डॉक्टर को याद दिलाया तो डॉक्टर ने कार्ड पर कोरोना जांच के लिए लिख दिया, लेकिन शाम तक सैंपल तक नहीं लिया। ये लापरवाही 6 दिनों तक चली। उनकी सास का 30 अप्रैल को निधन हो गया।
दूसरी लापरवाही : सैंपल लिए बिना भेज दिया सैंपल कलेक्ट करने का मैसेज
महेश ने बताया कि 23 अप्रैल को उनके मोबाइल फोन पर मैसेज आया कि गीता कुमारी का सैंपल कोरोना जांच के लिए कलेक्ट कर लिया है। साथ में ओटीपी भी आया। बहुत खुश हुआ कि चलो कोरोना जांच के लिए सैंपल तो ले लिया, फिर मां से वार्ड में जाकर पूछा तो उन्होंने कहा कि सैंपल नहीं लिया। इसके बाद काउंटर पर जाकर पूछा कि सैंपल के लिए आरटीपीसी वाले आए थे क्या, तो कर्मचारियों ने न में जवाब दिया। उन्होंने किसी दोस्त से कहलवाया तो सैंपल लिया गया। फिर शाम को रिपोर्ट मांगी तो पता चला जांच हुई ही नहीं थी। इसके बाद जब 25 अप्रैल तक रिपोर्ट नहीं मिली तो कोरोना जांच के लिए फाइल पर दोबारा लिख दिया, लेकिन इसके बाद भी सैंपल नहीं लिया गया। 25 से 30 अप्रैल तक कोरोना की जांच ही नहीं की गई। यह सबसे बड़ी लापरवाही थी।
महेश ने बताया कि उनकी मां की हालत बिगड़ने लगी तो 30 अप्रैल को डॉक्टर ने सिटी स्कैन कराने की सलाह दी। सिटी स्कैन कराया तो पता चला कि मां के फेफड़े सौ फीसदी खराब हो चुके हैं। इससे पहले कि कुछ कर पाते, 30 अप्रैल को मां का निधन हो गया।
चौथी लापरवाही: जीते जी नहीं, मरने के बाद कराया कोरोना टेस्ट
महेश ने बताया कि मां के निधन के बाद एक मई को मां का शव लेने कोविड वार्ड में गए तो वहां तैनात डॉक्टर ने उनसे पूछा कि क्या महिला कोरोना से संक्रमित थी। महेश ने डॉक्टर से कहा कि यह आप हमें बताइए। डॉक्टर ने कोविड की रिपोर्ट मांगी। महेश ने डॉक्टर से कहा कि रिपोर्ट स्टाफ के पास होगी। मुझे नहीं दी गई। पड़ताल की तो कोविड जांच सेंटर से पता चला कि गीता कुमारी का सैंपल लिया ही नहीं गया है। इसके बाद सैंपल लिया गया तो पाया गया कि गीता कुमारी कोरोना संक्रमित नहीं थी। इसके बाद अस्पताल से गीता कुमारी का शव उनके परिजनों को मिल पाया।
पंचकूला जनरल अस्पताल में आठ दिनों तक कोविड वार्ड में एक महिला मरीज दाखिल रही और उसकी कोरोना जांच नहीं की गई। इस मामले की जांच की जाएगी। -मुकेश कुमार आहुजा, उपायुक्त पंचकूला।
मृतक गीता कुमारी का मामला मेरे संज्ञान में है। इस मामले की जांच की जाएगी कि महिला 22 से 30 अप्रैल तक अस्पताल के कोविड वार्ड में दाखिल रही, बावजूद इसके उसका कोरोना टेस्ट नहीं किया गया। यह बड़ी लापरवाही है। यह जांच का विषय है।
- डॉ. जसजीत कौर, सीएमओ पंचकूला।