पंचकूला के गांव टिब्बी में सरपंच ने वाल्मीकि समुदाय के लोगों के लिए फरमान जारी कर तालाब में पशु ले जाने पर पाबंदी लगा दी है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर वे तालाब पर पशु लेकर गए तो उन्हें जुर्माना किया जाएगा। वहीं इस फरमान के बाद समुदाय के लोगों में रोष पनप रहा है।
उनका आरोप है कि सरपंच ने जाति विशेष के परिवारों पर ही इस तरह का प्रतिबंध लगाया है, जबकि अन्य ग्रामीणों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं है। मामले की शिकायत लेकर वाल्मीकि समाज के लोग डीसी से भी मुलाकात कर चुके हैं।
ग्रामीण सुरेंद्र पाल, जस्सी, अजैब सिंह, जसबीर, रूलदा राम, संदीप, कुलदीप, नायब सिंह, सुनीता देवी, सर्वती देवी समेत कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव टिब्बी की सरपंच महिला सलामते है, लेकिन उसके पति सलामुद्दीन ही सरपंची चला रहे हैं।
समुदाय के लोगों का कहना है कि सरपंच के पति ने गांव के चौकीदार से मुनियादी करवाकर गांव में रहने वाले वाल्मीकि समुदाय के लोगों को अपने पशु गांव के तालाब में ले जाने से रोक दिया है। गांव में वाल्मीकि समुदाय के 20 परिवार रहते हैं और हाल ही में इसे आरक्षित घोषित किया गया है।
लोगों का कहना है कि एक समुदाय के लिए यह फरमान जारी किया जाना गलत है। उनका कहना है कि वे पशुओं को पानी पिलाकर बाहर निकाल लेते हैं, लेकिन गांव में रहने वाले अधिकतर लोगों के घरों का गंदा पानी तालाब में गिराया जा रहा है।
घरों में पिलाएं जानवरों को पानी: सलामुद्दीन
गांव टिब्बी के सरपंच के पति सलामुद्दीन ने माना कि गंाव के कुछ परिवारों को तालाब पर पशुओं को ले जाकर पानी पिलाने से मना किया गया है। सभी के घरों में पानी के नल लगे हैं और पशुओं के तालाब में प्रवेश करने से अन्य पशुओं को भी बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। इन दुधारु पशुओं का दूध शहरों में बेचा जाता है, जिसका असर कई और लोगों पर पड़ सकता है। आदेश की अनदेखी किए जाने वालों पर जुर्माना लगाने का फैसला अधिकारियों के आदेश पर लिया गया है।
गांव टिब्बी के कुछ ग्रामीणों की शिकायत मिलने के बाद इससे संबंधित सभी पहलुओं की छानबीन की जा रही है। इस मामले में दोनों पक्षों से बातचीत के बाद आगे निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल सभी को शांति बहाल रखने के निर्देश दिए गए हैं।
दिनेश शर्मा, बीडीओ, बरवाला