चंडीगढ़। अलंकार थिएटर की ओर से आयोजित कला उत्सव के पहले दिन टैगोर थिएटर के मिनी ऑडिटोरियम में नाटक ब्रोकन डॉल का मंचन हुआ। इसका मंचन माता सुंदरी कॉलेज दिल्ली के विद्यार्थियों ने किया। उन्होंने परिंदे द ड्रामेटिक सोसाइटी के बैनर तले मंचन किया। नाटक के बारे में कलाकार अनन्या ने बताया कि इसमें पांच महिलाओं की कहानी है। यह नाटक मानव तस्करी पर आधारित है। इसमें दिखाया गया कि महिलाएं अपने-अपने देश से मानव तस्करी के सहारे विदेश में आ जाती हैं। उन्हें वहां पर सताया जाता है। इन पांचों महिलाओं में होटल कर्मचारी, बार डांसर, सेक्स वर्कर, काम वाली बाई और फार्म हाउस पर काम करने वाली महिला शामिल है।अनन्या ने बताया कि मानव तस्करी के बाद इन महिलाओं पर जो गुजरी उसे दिखाया गया। यह दिखाया गया कि सभी महिलाएं पुलिस की सहायता से एक शेल्टर होम पहुंचती हैं। सभी उस शेल्टर होम में एक-दूसरे से अपनी कहानी बताती हैं। और इसी के साथ नाटक संपन्न होता है।
अनन्या ने अधीरा की भूमिका निभाई। उन्होंने होटल वर्कर के रूप में अपनी प्रस्तुति दी। तवलीन ने सोफिया जो एक वार डांसर है, के रूप में भूमिका अदा की। कुमुद ने हेली की भूमिका में सेक्स वर्कर के दर्द को बयां किया। जबकि आरुषि ने एहुई की भूमिका में काम वाली बाई व एल्फी ने ब्लैंका की भूमिका में फार्म हाउस में काम करने वाली वर्कर के रूप में अपनी प्रस्तुति दी। सभी के दमदार प्रस्तुति ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया।
अलंकार थिएटर ग्रुप के निर्देशक चक्रेश कुमार ने बताया कि कला उत्सव के दौरान सुबह के सत्र में एक बातचीत रखी गई। इसमें चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के चेयरमैन अतुल शर्मा और शायर आकिब सबीर ने अपनी बात रखी।
अतुल शर्मा ने कलाकारों को उत्साहित किया। उन्होंने कहा कि कलाकार हमेशा नया करने की सोचता है। कोशिश करता है और कोशिश से ही जीत होती है। उन्होंने चींटी की कहानी बताते हुए कहा कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। अकिब साबिर ने उपस्थित कलाकारों को कहा कि सभी साहित्य अच्छे होते हैं। उन्होंने कहा कि आज का नाटक आज खेला जाएगा। लेकिन यही नाटक 50 साल के बाद इतिहास का हिस्सा बन जाएगा। साहित्य हमेशा देता ही रहता है। तुषार खन्ना ने कार्यक्रम का संचालन किया। चक्रेश कुमार ने बताया कि इस दौरान ओपन म्यूजिक के अलावा शहर के कई जगहों पर नुक्कड़ नाटक का मंचन हुआ। नाटक से पहले टैगोर में लोकगीत की प्रस्तुति हुई।