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19 वर्षों से शहीद के नाम परिवार जला रहा है अखंड ज्योति, 21 साल की उम्र में मिली थी शहादत

Mon, 23 Jul 2018 09:33 AM IST
मनन सैनी, अमर उजाला, गुरदासपुर (पंजाब)
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कारगिल
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जब कोई जांबाज सैनिक राष्ट्र की एकता व अखंडता को बरकरार रखते हुए शहीद हो जाता है तो उसकी शहादत अतीत के पन्नों में अंकित हो जाती है, मगर उस शहीद के परिजन अपने लाडले की शहादत की लौ को अपने दिल में संजो कर बाकी की जिंदगी उसकी याद में गुजार देते हैं। ऐसा ही एक परिवार है, कारगिल युद्ध में शहादत का जाम पीने वाले गांव सलाहपुर बेट निवासी सिपाही सतवंत सिंह का, जिनके लिए बेटे की शहादत एक इबादत बन चुकी है तथा इनके परिजनों ने पिछले 19 वर्षों से शहीद बेटे की प्रतिमा के सामने देसी घी की अखंड जोत प्रज्वलित कर रखी है। यही नहीं पूरा परिवार शहीद की प्रतिमा के सामने भोग लगाने के बाद ही अन्न ग्रहण करता है। 
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कारगिल युद्ध में पिया था शहादत का जाम 
शहीद सिपाही सतवंत सिंह की माता सुखदेव कौर व पिता कश्मीर सिंह ने नम आंखों से बताया कि उनके बेटे ने 4 जुलाई 1999 में पाक के साथ हुए कारगिल युद्ध में टाइगर हिल को फतेह करते हुए शहादत का जाम पिया था। कारगिल युद्ध के दौरान पठानकोट के मामून कैंट से सबसे पहले 8 सिख यूनिट को वहां पर भेजा गया था। इस यूनिट के संयुक्त ऑपरेशन से पाक सेना के कई सैनिक मारे गए और 8 सिख यूनिट के 30 सैनिकों ने शहादत का जाम पीकर टाइगर हिल पर तिरंगा फहराया था। जिनमें सतवंत सिंह सबसे कम उम्र 21 वर्ष के थे।  

यादों को जिंदा रखने के लिए जलाई अखंड ज्योति 
शहीद की माता सुखदेव कौर ने नम आंखों से बताया कि जिस दिन बेटे का अंतिम संस्कार हुआ, उसी दिन से वह उसकी तस्वीर के सामने अखंड जोत प्रज्वलित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि 5 वर्ष पहले उन्होंने गांव भुल्लेचक्क में अपने शहीद बेटे की याद में बने पेट्रोल पंप पर अपने खर्च से उसकी प्रतिमा लगवाई थी। अब यह अखंड ज्योति वहां पर दिन रात जल रही है।  
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हर सदस्य प्रतिमा को लगाता है भोग 

शहीद की प्रतिमा के साथ खड़े परिजन
 शहीद के पिता कश्मीर सिंह, मां सुखदेव कौर, भाई सतनाम सिंह, भाभी महिंदर कौर ने नम आंखों से बताया कि आज भी उनका परिवार सतवंत की प्रतिमा को भोग लगाने के बाद ही अन्न ग्रहण करता है। परिवार का हर सदस्य प्रतिमा को भोग लगाना अपना कर्तव्य समझता है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा आगे भी जारी रहेगी।  

तीन बेटों की मौत से बने पत्थर
शहीद के माता पिता ने बताया कि बेटे की शहादत के दुख से अभी वह उभर भी नहीं पाए थे कि वर्ष 2007 में उनके दूसरे बेटे नरिंद्र सिंह की बीमारी से व वर्ष 2012 को तीसरे बेटे हरभजन सिंह की बिजली गिरने से मौत हो गई। तीन बेटों के जाने से वह पत्थर बन कर रह गए हैं। इसके बावजूद देश के लिए कुर्बान हुए अपने बेटे की शहादत का गौरव उन्हें जिंदा रखे है।

परिजनों के जज्बे को देश का सलाम-कुंवर विक्की 
 शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंद्र सिंह विक्की ने कहा कि शहीद सतवंत सिंह के परिजनों के जज्बे को पूरे देश का सलाम है। 19 वर्षों से जल रही अखंड जोत एक मिसाल बनकर क्षेत्र के युवाओं में देशभक्ति की अलख जगाकर उनमें भारतीय सेना में भर्ती होकर देश पर मर मिटने का जज्बा पैदा कर रही है।  

शहीद को दिया भगवान का दर्जा 
शहीद सतवंत सिंह के परिजनों ने उन्हें भगवान का दर्जा दिया है। जिस जगह पर उनकी प्रतिमा लगी हुई है, उस जगह को मंदिर की तरह पूजा जाता है। हर कोई जूते उतार की अंदर जाता है। इसके साथ ही पेट्रोल पंप पर आने वाले सैनिक भी शहीद को सेल्यूट कर उन्हें सम्मान देते हैं। जिससे परिवार का मनोबल बढ़ता है। इस अवसर पर शहीद के भाई सतनाम सिंह, जिला एनआरआई सभा के प्रधान एनपी सिंह, मनजिंदर सिंह भी उपस्थित थे।
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