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किडनी खराब करने में स्टोन सबसे बड़ा कारण, हर महीने PGI पहुंच रहे 250 मरीज

Sun, 07 Jan 2018 10:49 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Dr Santosh kumar chandigarh - फोटो : अमर उजाला
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किडनी स्टोन अब घर-घर की बीमारी बन गई है। पूरे उत्तर भारत से हर महीने 250 मरीज पीजीआई पहुंच रहे हैं। किडनी को खराब करने में स्टोन सबसे बड़ा कारण बन चुका है। इसकी मुख्य वजह लोगों का खान-पान है। यह दावा पीजीआई में यूरोलॉजी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डा. संतोष कुमार ने किया है। शनिवार को वे यहां अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में पहुंचे थे। 
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उन्होंने बताया कि पानी की कमी और कुछ ऐसी चीजें जिनके लगातार खाने से स्टोन बनते हैं, उनसे बचना चाहिए। खासतौर से पालक, काजू और रेड मीट ज्यादा खाना अच्छा नहीं है। इनका रोजाना सेवन तो बिलकुल नहीं करना चाहिए। इसमें कैल्शियम ऑक्सीलेट की मात्रा अधिक होती है। पानी की मात्रा का विशेष ध्यान रखना चाएि। दिन भर एसी और पहाड़ों में रहने वाले लोगों के लिए दो से ढाई लीटर पानी उपयुक्त है जबकि फील्ड में काम करने वाले लोगों के लिए पांच लीटर पानी भी कम है। ऐसा नहीं है कि सभी को खूब पानी पीना चाहिए। उदाहरण के तौर पर बुजुर्गों को रोज सादा पानी नहीं पीना चाहिए। सादा पानी पीने से बुजुर्गों में सोडियम की मात्रा कम हो सकती है। इसके अलावा पानी की मात्रा लोगों के रहन-सहन पर काफी निर्भर करती है।

लोगों की गलती से खराब होती है किडनी
डा. संतोष ने बताया कि किडनी में रुकावट होने से मरीज को दर्द होता है। कई लोग बिना जांच करवाए पेन किलर खाने लगते है। इससे नुकसान यह होता है कि धीरे-धीरे स्टोन किडनी को नुकसान पहुंचाता रहता है। बाद में किडनी खराब हो जाती है। किडनी के खराब होने पर मरीज को दर्द कम होता है और वह सोचता है कि सबकुछ ठीक हो गया है। दवा लेने से किडनी में रक्त का प्रवाह भी कम होता है, इससे भी किडनी पर काफी बुरा असर पड़ता है। इसलिए जब भी स्टोन हो तो जल्द से जल्द यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।
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एक बार स्टोन होने पर दोबारा 50 प्रतिशत चांस

Dr Santosh kumar chandigarh - फोटो : अमर उजाला
एक बार स्टोन होने पर दोबारा 50 प्रतिशत चांस
उन्होंने बताया कि यदि किसी को किडनी स्टोन हुआ है तो दस साल के भीतर 50 फीसदी चांस है कि उसे दोबारा से यह हो सकता है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि  वे ज्यादा ध्यान रखें। वह इतना पानी पीए कि उन्हें 24 घंटे में दो लीटर यूरिन (पेशाब) हो। उन्होंने बताया कि दो से चार एमएम के स्टोन तरल पदार्थ के सेवन से निकल सकते हैं। मगर दस एमएम का स्टोन किडनी को पूरी तरह से खराब कर सकता है। हालांकि यूरिक एसिड से बने दस एमएम के स्टोन को दवा से नष्ट किया जा सकता है। अन्य स्टोन को निकालने के लिए सर्जरी करनी पड़ती है।

देसी इलाज पर कुछ नहीं बोलूंगा
स्टोन के देसी इलाज पर उन्होंने कुछ भी कमेंट करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई स्टोन का इलाज देसी तरीके से करवा रहा है तो समय-समय पर अल्ट्रासाउंड करवाते रहे और किसी यूरोलॉजिस्ट को दिखाएं। स्टोन के इलाज के लिए मार्केट में कई सारी दवाएं हैं जिनके खाने से पेशाब के रास्ते से स्टोन निकल जाते हैं। पीजीआई में सबसे ज्यादा पेशेंट हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल, जम्मू कश्मीर और बिहार से आते हैं।

क्या खाएं, क्या न खाएं
जिन्हें स्टोन हुआ है, उन्हें नींबू-संतरे लेने चाहिए। ये कैल्शियम आक्सीलेट को बनने से रोकते हैं। ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए। रेड मीट, पालक और काजू खाने से बचना चाहिए। जिन्हें ज्यादा पसीना निकलता है और हाई डाइट लेते हैं, उन्हें पानी की मात्रा ज्यादा लेनी चाहिए।
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