फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh News: एमबीबीएस छात्र को नहीं दिया स्टाइपेंड, ज्ञान सागर एजुकेशन एवं चैरिटेबल ट्रस्ट पर सात हजार का हर्जाना

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। ज्ञान सागर एजुकेशन एवं चैरिटेबल ट्रस्ट समेत ज्ञान सागर मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, बनूड़ एवं अन्य को एक मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने 7 हजार रुपये हर्जाना भरने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा शिकायतकर्ता की सिक्योरिटी रकम 40 हजार रुपये 9 प्रतिशत ब्याज दर समेत वापस करने और 10 हजार रुपये अदालती खर्च के रूप में भी चुकाने को कहा गया है। उनके खिलाफ एमबीबीएस छात्र ने छह माह का स्टाइपेंड नहीं देने की शिकायत दी थी। मामले में बरनाला निवासी डॉ. नवरोज कपिल ने ज्ञान सागर एजुकेशन एवं चैरिटेबल ट्रस्ट के सेक्टर-43बी स्थित मुख्य कार्यालय को उसके मौजूदा प्रधान के जरिए, ज्ञान सागर मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, बनूड़ के वित्त एवं बिलिंग इकाई के मुखी समेत पंजाब मेडिकल एजुकेशन भवन, मोहाली में कार्यरत मेडिकल एजुकेशन एवं रिसर्च के निदेशक को पार्टी बनाया था। प्रतिवादी पक्ष के कृत्य को सेवा में कोताही और गलत व्यापारिक गतिविधियों वाला बताते हुए यह शिकायत दी गई थी। आयोग ने पाया कि प्रतिवादी पक्ष ने शिकायतकर्ता को कॉलेज, लाइब्रेरी और छात्रावास की कुल सिक्योरिटी 40 हजार रुपये नहीं लौटाई थी।
विज्ञापन

एमबीबीएस कोर्स में लिया था दाखिला
शिकायतकर्ता ने वर्ष 2011-12 के सत्र के लिए कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स में दाखिला लिया था। कोर्स पूरा करने के बाद उन्होंने जनवरी 2016 से दिसंबर 2016 तक इंटर्नशिप दिया। उन्हें सिर्फ जून, 2016 तक का ही स्टाइपेंड दिया गया। वहीं जुलाई से दिसंबर, 2016 के बीच का स्टाइपेंड नहीं दिया गया। यह कुल 72 हजार रुपये बनता था। शिकायतकर्ता ने इसके लिए 15 जून, 2019 को मांगपत्र भी दिया था। हालांकि आयोग ने स्टाइपेंड को लेकर कहा कि शिकायतकर्ता कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के प्रावधानों के तहत (स्टाइपेंड के संबंध में) उपभोक्ता नहीं है। मामले में प्रतिवादी एक और दो के रूप में ज्ञान सागर एजुकेशन एवं चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से समय पर लिखित जवाब पेश नहीं किया गया। वहीं मेडिकल एजुकेशन एवं रिसर्च के निदेशक पेश नहीं हुए जिसे लेकर उन्हें 28 जुलाई, 2020 के आदेशों में एक्स पार्टी कर दिया गया था। अपने फैसले में जिला उपभोक्ता आयोग ने स्टाइपेंड का आकलन करने और साक्ष्यों को देखते हुए एवं दलीलों पर गौर करने के बाद अपना फैसला दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें