चंडीगढ़ पीजीआई के डॉक्टर ने एक ऐसा ई-स्टेथोस्कोप तैयार किया है जिसमें मरीज को छुए बिना डॉक्टर उसके हृदय का हाल जान सकेगा। इसकी मदद से 20 मीटर की दूरी से हृदय संबंधी बीमारियों का पता लगाया जा सकेगा।
पीजीआई कार्डियोलॉजी विभाग के डॉ. बसंत कुमार की ओर से बनाए गए ई-स्टेथोस्कोप का संस्थान ने पेटेंट करवा लिया है। जल्द ही इसे बाजार में उतारा जाएगा। शनिवार को संस्थान में होने वाले वार्षिक शोध दिवस पर इसे सर्वश्रेष्ठ इनोवेशन में शामिल किया गया है।
मरीज के संपर्क में आने से बचाएगा
डॉ. बसंत कुमार ने बताया कि चिकित्सा परीक्षण में पुराने स्टेथोस्कोप और ई-स्टेथोस्कोप के बीच परिणाम में कोई अंतर नहीं पाया गया है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है जिससे यह मरीज के साथ निकट संपर्क में आने से डॉक्टर को बचाएं। यह बैटरी से संचालित होने के साथ ही रिचार्जेबल डिवाइस और ब्लूटूथ से भी लैस है। ब्लूटूथ के माध्यम से शरीर की आंतरिक ध्वनि को सेल फोन और स्पीकर तक पहुंचाया जाता है। इसकी मदद से दूर खड़े मरीज के हाथ में स्टेथोस्कोप होने के बावजूद ब्लूटूथ डिवाइस से जुड़े होने के कारण डॉक्टर उसके हृदय और फेफड़े की स्थिति का सही तरह आकलन कर पता है। वहीं, मरीज के डाटा को डिवाइस के क्लाउड में सुरक्षित किया जा सकता है जिससे उसका पुनः उपयोग किया जा सके।
टेली मेडिसिन में भी कारगर
ई स्टेथोस्कोप की मदद से स्वास्थ्य केंद्रों व सिविल अस्पतालों में आने वाले मरीजों का स्वास्थ्यकर्मी रिकॉर्ड ले सकेंगे। इसका दूर बैठा विशेषज्ञ आकलन कर मरीज के मर्ज का इलाज बता पाएगा। ऐसी स्थिति में इस डिवाइस से छोटे स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सा व्यवस्था मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।
क्षमता का आकलन करने के लिए 202 मरीजों पर किया परीक्षण
डॉ. बसंत ने बताया कि ई स्टेथोस्कोप की क्षमता का आकलन करने के लिए पीजीआई एडवांस कार्डियक सेंटर में हृदय रोग से संबंधित 202 मरीजों पर परीक्षण किया गया। इसमें 66 फीसदी पुरुष और 34 फीसदी महिलाएं शामिल थीं। उन मरीजों पर पारंपरिक और ई स्टेथोस्कोप दोनों का उपयोग किया गया, जिसमें दोनों ही परिणाम का आकलन उन मरीजों की इकोकार्डियोग्राफी से की गई। उन मरीजों के इकोकार्डियोग्राफी में कोई भी अंतर नहीं पाया गया जिससे साबित होता है कि है इस स्टेथोस्कोप पारंपरिक स्टेटस स्कोप के समान ही परिणाम देने वाला है।