यूटी में इस बार भी शराब के ठेकों की संख्या कम रहेगी। मंगलवार को जीएमसीएच-32 के सराय ऑडिटोरियम में सुबह 10 बजे से समाज कल्याण और सहकारिता सचिव वी लालरेमथंगा की देखरेख में ठेकों की नीलामी हुई।
इसमें 173 में से 119 देसी और अंग्रेजी शराब के ठेकों की नीलामी हुई। 54 ठेकों के लिए किसी ने बिड नहीं लगाई। इनमें 32 अंग्रेजी और 22 देसी शराब के ठेके हैं।
इस बार सबसे महंगा ठेका 2.61 करोड़ रुपये में बिका। इस बार भी कई ठेके उन्हीं ठेकेदारों ने लिए जिन्होंने पिछले साल ठेके लिए थे। वहीं कई ऐसे ठेकेदार भी थे, जिन्होंने इस बार भी शहर में तीन या चार से ज्यादा शराब के ठेके लिए। विनीत खन्ना ने नौ ठेके लिए। इस बार ठेके 10 माह के लिए दिए गए हैं।
नई एक्साइज पॉलिसी एक जून से लागू हो रही है। ठेकेदारों का कहना है कि प्रशासन ने नई आबकारी नीति उनके फायदे को ध्यान में रखकर नहीं तैयार की है। यह इसी से स्पष्ट हो जाता है कि 54 ठेके खाली रह गए हैं।
पिछले साल प्रशासन की ओर से 23 अप्रैल को कराई गई पहली नीलामी में 103 ठेके नीलाम हुए थे और प्रशासन को 97.47 करोड़ रुपये का राजस्व हुआ था। बाद में कई और ठेके भी नीलाम हो गए थे।
इस बार दस माह के लिए ठेके
आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस बार अंग्रेजी शराब के ठेकों का राजस्व पिछले साल से 16 फीसदी अधिक है और देसी शराब के ठेकों से राजस्व 19 फीसदी अधिक है। इस बार यह ठेके 10 माह के लिए अलॉट हो रहे हैं, जबकि पिछले साल यह ठेके 12 महीने के लिए अलॉट हुए थे।
इस बार अंग्रेजी शराब के ठेकों से 79.28 करोड़ रुपये और देसी शराब के ठेकों से 13.04 करोड़ का राजस्व हुआ। अंग्रेजी शराब के ठेकों का कुल रिजर्व प्राइस 68.35 करोड़ था और देसी शराब के ठेकों का कुल रिजर्व प्राइस 10.91 करोड़ रुपये था।
छूटे ठेकों के लिए दोबारा लगेगी बोली
इस बार देसी शराब के 50 ठेकों में से 28 के लिए ही बोली लगी। अंग्रेजी शराब के कुल 123 ठेकों में से 91 के लिए ही बिड आई थी। अब 54 ठेकों के लिए दोबारा से बोली लगेगी। इस बार सबसे महंगा ठेका 2.61 करोड़ में बिका। अंग्रेजी शराब का यह ठेका सेक्टर-42 की मार्केट में है और इसका रिजर्व प्राइस 1.4 करोड़ रुपये था।
यह ठेका दर्शन सिंह कलेर ने लिया। सबसे सस्ता ठेका 45 लाख रुपये में सेक्टर-20 में नीलाम हुआ। देसी शराब के ठेकों में सबसे महंगा ठेका 91.9 लाख रुपये में बिका। यह ठेका खुड्डा लाहौरा में है और इसका रिजर्व प्राइस 72.2 लाख रुपये था। यह ठेका गुरइकबाल सिंह ने खरीदा। सबसे सस्ता ठेका सेक्टर-38 में 27.5 लाख में बिका।
पिछले साल सबसे महंगा ठेका कजहेड़ी का नीलाम हुआ था और इसके लिए 2.22 करोड़ रुपये की बिड लगी थी। वहीं वर्ष 2012 में आईएसबीटी सेक्टर-43 के सामने सेक्टर-52 का ठेका चार करोड़ 25 लाख रुपये में नीलाम हुआ था और बहलाना का ठेका पांच करोड़ 25 लाख रुपये में नीलाम हुआ था।
इस संबंध में चंडीगढ़ की अतिरिक्त उपायुक्त तन्वी गर्ग ने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस साल हमारा राजस्व बढ़ा है, क्योंकि इस बार ठेके 10 माह के लिए ही नीलाम हुए हैं।
तीन घंटे में 92.32 करोड़ का राजस्व
चंडीगढ़ प्रशासन के आबकारी एवं कराधान विभाग ने तीन घंटे में 92.32 करोड़ रुपये कर राजस्व प्राप्त किया। सुबह 10 बजे से बंद बक्से से टेंडर खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई और लगभग एक घंटे बाद अधिकतम बिड के आधार पर ठेकों की अलाटमेंट की प्रक्रिया शुरू हुई।
दोपहर लगभग एक बजे नीलामी की प्रक्रिया खत्म हो गई। इस मौके पर समाज कल्याण और सहकारिता सचिव वी लालरेमथंगा, उपायुक्त मोहम्मद शाईन, अतिरिक्त उपायुक्त तन्वी गर्ग, सहायक आबकारी एवं कराधान आयुक्त आरसी भल्ला भी मौजूद थे।
सबसे महंगे ठेके
- 2.61 करोड़ में सेक्टर-42 मार्केट
- 1.31 करोड़ में इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 में
- 1.13 करोड़ में सेक्टर-22 बी मार्केट
- 1 करोड़ में सेक्टर-8 की मार्केट में
- 1.31 करोड़ सेक्टर-15 की मार्केट में
- 1.13 करोड़ सेक्टर-9 की मार्केट में
- 1.11 करोड़ सेक्टर-26 स्थित ग्रेन मार्केट
- 1.11 करोड़ सेक्टर-30 की मार्केट में