बच्चे को बचाते हुए एक पांव खोने के बावजूद मुकेश कुमार ने हिम्मत नहीं हारी और अपने दम पर पैरा टेबल टेनिस चैंपियनशिप में हिस्सा लेते हुए मेडल जीतने शुरू कर दिए। यह सिलसिला आज भी जारी है। मुकेश ने नेशनल में 14 गोल्ड मेडल, 8 सिल्वर मेडल और 7 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। इसके साथ ही इंटरनेशनल स्तर पर भी मुकेश 6 गोल्ड, 10 सिल्वर, 14 ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं।
पूनम की उपलब्धियां
साल 2009 में शादी के बाद पूनम ने पति मुकेश के साथ टेबल टेनिस खेलना शुरू किया था। पोलियो बचपन में हो गया था। इस वजह से शुरुआत में दिक्कत हुई, लेकिन कुछ दिनों की मेहनत के बाद बेहतर करने लगीं। उन्होंने इंटरनेशनल स्तर पर 3 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर 8 गोल्ड, एक सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं।
पटियाला के पास सिरमौर के रहने वाले राजकुमार इन दिनों पैरा ओलंपिक 2021 क्वालीफाइंग राउंड पास करने के लिए पसीना बहा रहे हैं। यह कैंप करनाल में लगा हुआ है। अगले महीने स्पेन में होने वाली पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाली भारतीय पैरा बैडमिंटन टीम का हिस्सा हैं। स्पेन में बेहतर करने वाले खिलाड़ियों को ओलंपिक क्वालीफाइंग के लिए टिकट हासिल होगा। 1993 में घर की छत से गिरकर राजकुमार का बायां हाथ टूट गया था, बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। 1998 से वे पैराबैडमिंटन खेल से जुड़ गए और देश और विदेशों में मेडल बटोर रहे हैं। यह खिलाड़ी सिंगल, डबल्स, मिक्स डबल्स इवेंट में हिस्सा लेता है।
सफलाएं
वर्ल्ड चैंपियनशिप 2007 में कोरिया में एक सिल्वर, एक ब्रॉन्ज, 2009 कोरिया में दो गोल्ड मेडल, 2013 जर्मनी में ब्रॉन्ज मेडल, 2015 इंग्लैंड में एक गोल्ड और एक ब्रॉन्ज मेडल, 2017 डेनमार्क में एक ब्रॉन्ज मेडल और 2019 डेनमार्क में एक ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।
अमृतसर की रहने वाली वीना अरोड़ा अगले महीने जॉर्डन में पैरा ओलंपिक क्वालीफाइंग राउंड के लिए जा रही हैं। इसे जीतने के बाद उनका ओलंपिक का टिकट पक्का हो जाएगा। उन्होंने बताया कि आजकल वह दिन-रात मेहनत कर रही हैं। वीना अरोड़ा वर्ष 2000 में एक गलत टीका लगने के कारण दायां हाथ गंवा बैठी थीं। इसके बाद 2010 में पैरा गेम्स में हिस्सा लेते हुए ताइक्वांडो के खेल से जुड़ गईं। तब से आज तक 10 इंटनेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लेते हुए सभी में मेडल बटोर चुकी है। वहीं वर्ष 2016 में फिलिपंस में इंटरनेशनल ताइक्वंडों में भारतीय महिला दल से हिस्सा लेने वाली एकमात्र महिला खिलाड़ी रहीं, उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल भी जीता।