नर्सरी विंग के खिलाड़ी अब खेल के मैदान से गोल (बंक) नहीं मार सकेंगे। उनको प्रेक्टिस के लिए मैदान में उतरना ही होगा। खेल विभाग की ओर से नर्सरी विंग के खिलाड़ियों का पूरा ब्योरा ऑनलाइन किया जा रहा है, जिससे उनकी प्रेक्टिस पर विशेष नजर रखी जा सके।
इससे पता चल सकेगा कि खिलाड़ी वह किस वक्त मैदान में पहुंचे और कितनी देर प्रेक्टिस की। यह सब कुछ बायोमैट्रिक सिस्टम के सहारे कंप्यूटर पर रहेगा। बायोमैट्रिक सिस्टम के लिए रेटीना को स्कैन कराने की योजना भी बन रही है, लेकिन इस पर आखिरी फैसला होना अभी बाकी है कि अंगूठे को शामिल किया जाए या रेटीना को स्कैन कराया जाए।
खेल विभाग के अधिकारी भी ऑनलाइन होंगे और उनको भी कार्यालय में पहुंचना जरूरी होगा। खिलाड़ियों को छोटी उम्र से तैयार करने के लिए खेल विभाग की ओर से हर सुविधा दी जाती है, जिसके लिए नर्सरी विंग बनाई गई है। इस विंग के खिलाड़ियों को खेल विभाग की ओर से रोजाना सुबह व शाम को नियमित प्रेक्टिस कराई जाती है। सरकार के इतना कुछ करने के बावजूद खिलाड़ी बंक मार जाते हैं।
मैदान में खिलाड़ियों के नहीं पहुंचने से उनकी नियमित प्रेक्टिस रुक जाती है। खिलाड़ियों को बंक मारने से रोकने के लिए ही उनका पूरा ब्योरा ऑनलाइन करने की तैयारी है। इसके लिए बायोमैट्रिक सिस्टम भी लगाया जाएगा। बायोमैट्रिक मशीन के लिए खिलाड़ियों का रेटीना स्कैन कराने की योजना बन रही है। हालांकि अभी इस फैसले पर अंतिम मुहर नहीं लगी है।
जल्द ही तय होगा कि खिलाड़ियों का रेटीना स्कैन कराया जाएगा या अंगूठे को बायोमैट्रिक सिस्टम में शामिल किया जाएगा। जिला खेल अधिकारी ओमपति मल्हान ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इस योजना पर काम चल रहा है, खिलाड़ियों का सारा रिकॉर्ड ऑनलाइन किया जा रहा है। खिलाड़ियों के मैदान में प्रेक्टिस करने की पूरी जानकारी भी ऑनलाइन की जाएगी।
इधर, खेल विभाग के अधिकारी भी ऑनलाइन
प्रदेश में खेल विभाग के अधिकारी भी ऑनलाइन कर दिए गए हैं और उनका कार्यालय में पहुंचना अनिवार्य हो गया है। अगर वह कार्यालय में नहीं पहुंचते हैं और किसी तरह की सूचना भी उच्च अधिकारियों को नहीं देते हैं तो उनको अनुपस्थित माना जाएगा। उनके लिए बायोमैट्रिक सिस्टम में अंगूठा पंच करना जरूरी है। करीब 15 दिन पहले ये नियम लागू कर दिया गया है।