चंडीगढ़। सेक्टर-24 के अणुव्रत भवन के तुलसी सभागार में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में मनीषी संत मुनिश्री विनय कुमार आलोक ने कहा कि आध्यात्मिक प्रक्रिया व्यक्ति को भीतर से मजबूत और संतुलित बनाती है। उन्होंने कहा कि वास्तविक आध्यात्मिकता वही है जो व्यक्ति को बाहरी परिस्थितियों से प्रभावित हुए बिना अपने मन और ऊर्जा को नियंत्रित करना सिखाए।
मुनिश्री ने कहा कि आत्म-जागरूकता और साक्षी भाव विकसित करने से व्यक्ति अपने मूल स्वरूप को समझ पाता है। यदि इंसान अपने भीतर संतुलन और अंतर को पहचानने की क्षमता विकसित नहीं करता तो जीवन में भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक मार्ग पर चलते समय नए अनुभव और विचार कई बार भ्रम पैदा करते हैं, लेकिन यही भ्रम व्यक्ति को नए आयामों तक पहुंचाता है।
उन्होंने कहा कि जीवन तभी सुंदर है जब व्यक्ति उसकी सीमाओं और वास्तविक उद्देश्य को समझे। केवल सांसारिक दौड़ में उलझा जीवन अंत में पछतावा छोड़ जाता है। मुनिश्री ने कहा कि शिक्षा जहां दूसरों के सामने खुद को प्रस्तुत करना सिखाती है, वहीं आध्यात्मिकता व्यक्ति को अपने भीतर खुद को संभालना सिखाती है।