गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि संविधान दिवस देश के गौरव का प्रतीक है, जो कि देश के सभी लोगों को संविधान की अनुपालना के लिए प्रेरित करता है। हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं। इसलिए इसका संविधान भी दुनिया के अन्य देशों से अनेक मायनों में अलग है।
हमारे संविधान ने वर्तमान में जीवन जीने के नियम व भविष्य को सुरक्षित रखने में कोई कमी नही छोड़ी है। जिस प्रकार से गीता सार को ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ से समझा जा सकता है, उसी प्रकार संविधान को समझने के लिए उसकी प्रस्तावना ही काफी है।
इसमें देश की एकता व अखंडता, नागरिकों के मौलिक अधिकार, धर्म एवं उपासना की स्वतंत्रता व स्वतंत्र न्यायपालिका सहित अनेक व्यवस्थाएं दी गई है। इसीलिए डॉ. भीमराव अम्बेडकर को भारत के संविधान का जनक कहा जाता है।
न्यायपालिका को अलग रखना दूरदर्शी सोच: हुड्डा
नेता प्रतिपक्ष हुड्डा ने महाराष्ट्र के मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि विधायिका और न्यायपालिका को इसलिए ही संविधान में अलग-अलग रखा गया। संविधान सभा की सोच दूरदर्शी थी, सभा सदस्य जानते थे कि विधायिका कभी भी मनमानी कर सकती है, इसलिए न्यायपालिका का अलग होना जरूरी है।
देश में लोकतंत्र व प्रजातंत्र संविधान के मजबूत होने के कारण ही हैं। पाकिस्तान में प्रजातंत्र इसलिए नहीं है, चूंकि उनका संविधान कमजोर है। उन्होंने कहा कि संविधान की मजबूती को बनाए रखने के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है। उनके लिए और खुशी की बात यह है कि उनके पिता का जन्म भी 26 नवंबर के दिन ही 1914 में हुआ था।