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पहली बार PGI ने मात्र 13 मिनट में दो अंगों को पहुंचाया एयरपोर्ट

Fri, 15 Jan 2016 01:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पीजीआई ने ट्रैफिक पुलिस, कमांड और दिल्ली के आर्मी हास्पिटल के बीच सटीक को-आर्डिनेशन की मदद से पहली बार एक स्पेशल ट्रैफिक रूट (ग्रीन कॉरिडोर) का इस्तेमाल कर दो अंगों को दिल्ली के हास्पिटल में समय पर पहुंचाने में सफलता प्राप्त की है। इससे पहले पिछले साल आठ अगस्त को पीजीआई ने ग्रीन कारिडोर का प्रयोग कर एक मॉक ड्रिल की थी।
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जानकारी के मुताबिक कसौली (सोलन, हिमाचल प्रदेश) में एक 40 वर्षीय व्यक्ति पहाड़ से गिर गया था। उसे मोहाली के एक हास्पिटल में एडमिट कराया गया। मोहाली हास्पिटल ने पीजीआई को सूचना दी कि पेशेंट ब्रेन डेड है और उसके अंग सुरक्षित है।

सूचना मिलते ही पीजीआई ने ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर को भेजकर पेशेंट के परिजनों को अंगदान के लिए तैयार किया। परिजनों से हरी झंडी मिलने के बाद पीजीआई ने पहले अपने उन मरीजों की सूची देखी, जिन्हें अंग की जरूरत है।
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किडनी, क्रोनिया और पेनक्रियाज का तो पेशेंट मिल गए, लेकिन हार्ट व लीवर के ब्लड ग्रुप मैच नहीं किए। दिल्ली एम्स और आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हास्पिटल में संपर्क किया गया तो पेशेंट मिल गए। आर्मी हास्पिटल की टीम चंडीगढ़ पहुंची। दूसरी तरफ पीजीआई और चंडीमंदिर के कमांड हास्पिटल की सर्जरी टीम ने मरीज के शरीर से सुरक्षित अंग निकाले।

आर्मी हास्पिटल की टीम ने स्पेशल प्लेन तैयार कराया। एयरपोर्ट तक अंगों को जल्द से जल्द पहुंचाने के लिए पीजीआई ने ट्रैफिक पुलिस से संपर्क साधा। करीब पांच महीने पहले अंगों को ले जाने के लिए मॉक ड्रिल कर चुकी ट्रैफिक पुलिस ने फटाफट एयरपोर्ट तक एक स्पेशल रूट तैयार कराया।

मात्र 13 मिनट के भीतर एंबुलेंस हार्ट और लीवर को लेकर एयरपोर्ट पहुंच गई। स्पेशल विमान की मदद से अंगों को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचाया गया। बताया गया कि एयरपोर्ट से एम्स और आर्मी हास्पिटल तक एक स्पेशल रूट तैयार किया गया। शाम तक अंग दिल्ली के हास्पिटल पहुंच चुके थे।

टाइम लाइन
1.00 बजे दोपहर (13 जनवरी) : मोहाली के हास्पिटल ने पीजीआई को ब्रेन डेड पेशेंट की प्राइमरी सूचना दी।
3.30 बजे: पीजीआई ने हास्पिटल से पेशेंट के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर बातचीत शुरू की।
5.30 बजे: मरीज के परिजनों ने पीजीआई को स्वीकृति दी कि वे पेशेंट के अंगों को दान करना चाहते हैं।
8.00 बजे: मोहाली से मरीज पीजीआई के एडवांस कार्डियक सेंटर पहुंचा और जरूरतमंद मरीजों की तलाश शुरू की गई।
8.20 बजे :पीजीआई को अपने संस्थान में पांच पेशेंट मिल गए, जबकि दो के लिए आर्मी हास्पिटल को सूचना दी।
11.00 बजे रात: पीजीआई के ब्रेन डेड सर्टिफिकेशन कमेटी ने पेशेंट को ब्रेन डेड घोषित किया।
5.45 बजे सुबह (14 जनवरी): पीजीआई ने दोबारा से पेशेंट को ब्रेन डेड घोषित किया।
7.30 बजे: दिल्ली से आर्मी हास्पिटल की टीम पहुंची। कमांड हास्पिटल से दो सर्जन भी।
9.30 बजे: पीजीआई व कमांड हास्पिटल की सर्जरी की टीम अंगों को सुरक्षित निकालने का काम शुरू किया।
2.19 बजे: पीजीआई से अंगों को लेकर कमांड हास्पिटल की एंबुलेंस निकली।
2.32 बजे: एंबुलेंस टेक्नीकल एयरपोर्ट तक पहुंच गई।
4.40 बजे: हार्ट एम्स और लीवर आर्मी के हास्पिटल पहुंच चुके थे। उसके बाद ट्रांसप्लांट की कार्रवाई शुरू हो गई।

सात लोगों को दी नई जिंदगी
सोलन के 40 वर्षीय व्यक्ति के परिजनों की कोशिश से सात लोगों को नई जिंदगी मिली है। डोनर डेराब्यास सत्संग से जुड़े थे और सेवा करते वक्त पहाड़ से गिर पड़े थे। उनके दो बच्चे हैं और वे पेशे से आर्किटेक्ट थे। कसौली का अंग नहीं मिलने से इन सातों की जिंदगी दिन पर दिन मुश्किल होती जा रही थी। पीजीआई ने दो मरीजों को किडनी, दो को आंखें और एक को पेनक्रियाज लगाया, जबकि हार्ट एम्स के मरीज को दिया गया, जबकि लीवर आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हास्पिटल को दिया गया।

13 मिनट लगे पीजीआई से एयरपोर्ट तक
पीजीआई से अंगों को लेकर निकली कमांड हास्पिटल की एंबुलेंस को एयरपोर्ट तक पहुंचने में मात्र 13 मिनट का समय लगा। डीएसपी ट्रैफिक राजीव अम्बष्ट ने बताया कि इसके लिए पीजीआई से मटका चौक, ट्रांसपोर्ट लाइट प्वाइंट, ट्रिब्यून चौक, हल्लोमाजरा और फिर वहां से टेक्निकल एयरपोर्ट। राजीव ने बताया कि इस रूट में उनका स्टाफ तैनात था। इसलिए न तो जाम लगा और न ही ज्यादा समय।
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