देश में पति के जुल्मों की शिकार महिलाओं की हालत और भविष्य में घरेलू हिंसा की घटनाओं पर एक खास रिपोर्ट पढ़िए, आंकड़े देखकर आपकी रूह कांप जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले हरियाणा में महिलाएं आजादी के 70 साल बाद भी पुरुष प्रधान समाज की ज्यादतियों का शिकार हो रही हैं। हर तीन विवाहित महिलाओं में से एक पति के जुल्मों से परेशान है।
हरियाणा सरकार ने विजन डॉक्यूमेंट-2030 के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों के तहत महिलाओं के वर्तमान हालात को जगजाहिर किया है। पुलिस विभाग से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर तैयार डॉक्यूमेंट में उल्लेख किया गया है कि प्रदेश में प्रति लाख जनसंख्या पर महिलाओं के खिलाफ 73 फीसदी आपराधिक घटनाएं हो रही हैं। यह राष्ट्रीय औसत से बीस प्रतिशत ज्यादा है।
महिलाएं पतियों की गाली-गलौच और प्रताड़ना की तो आदी हो चुकी हैं। विवाहिताओं का शोषण भी सामान्य बात है। इसके साथ ही हरियाणा में बच्चों के खिलाफ प्रति लाख जनसंख्या पर 27.4 प्रतिशत अपराध हो रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 20.1 है। हरियाणा में हिंसात्मक अपराध की दर 37 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 26.6 से अधिक से है।
भविष्य में इन बिंदुओं पर रहेगा फोकस
domestic voilence
- फोटो : demo pic
- हिंसा से मौतें, गाली-गलौच, शोषण, महिला तस्करी और प्रताड़ना के मामले बेहद कम करना।
- सभी महिलाओं के लिए न्याय सुनिश्चित करना। खासकर अनदेखी का शिकार तबके के लिए।
- सुनियोजित हत्याओं के मामले 2030 तक प्रति लाख जनसंख्या पर दो फीसदी कम करना।
- महिलाओं के खिलाफ अपराध में 2030 तक पचास फीसदी कमी लाना।
पुलिस विभाग की योजना
- 2019 तक थानों की संख्या 350, 2022 तक 400 और 2030 तक पांच सौ करना। अभी 240 थाने व 21 महिला पुलिस थाने हैं।
- पुलिस में महिलाओं की भागीदारी 2019 तक दस प्रतिशत, 2022 तक 14 प्रतिशत और 2030 तक बीस फीसदी की जाएगी।
- उच्च स्तरीय जांच की मांग वाले केसों की संख्या 2019 तक 17, 2022 तक 16 और 2030 तक 15 फीसदी करना।
महिलाओं में बढ़ा सुरक्षा का भाव : संधू
डीजीपी बीएस संधू के अनुसार महिला पुलिस थाने खुलने के बाद महिलाओं में सुरक्षा का भाव बढ़ा है। वे अपनी शिकायत खुले मन से कर सकती हैं। महिला उत्पीड़न के केस तत्काल सुलझाने की कोशिश रहती है। 2030 तक हर लक्ष्य हासिल करेंगे। उधर, हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन प्रतिभा सुमन ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कमी लाने के रोडमैप पर काम जारी है।