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पंजाब में नशे की लत और कारोबार पर ये रिपोर्ट, PM मोदी के होश उड़ाने को काफी है

Wed, 28 Jun 2017 09:32 AM IST
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब में नशे की लत और कारोबार पर तैयार ये रिपोर्ट और समीक्षा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के होश उड़ाने के लिए काफी है। आप भी चौंक जाएंगे इसे पढ़कर। रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने वर्ष 2017-18 के बजट में सेहत और शिक्षा के लिए जितनी राशि की व्यवस्था की है, उससे कहीं ज्यादा पैसों का पंजाबवासी हर साल नशा कर लेते हैं।
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सूबे में नशे के कारोबार को लेकर किए गए एक सर्वे में यह खुलासा हुआ है कि राज्य के लोग हर साल 14,000 करोड़ रुपये केवल नशे पर खर्च कर देते हैं। खास बात यह है कि सरकार ने इस साल बजट में सेहत व परिवार कल्याण की मद में करीब 1358 करोड़ रुपये और शिक्षा के लिए करीब 9678 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

यानी करीब 11036 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। यही नहीं, सरकार ने रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए भी केवल 91 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

सरकार की प्रतिबद्धता भी कहीं ​दिखाई नहीं देती

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पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने सत्ता संभालते ही नशे को जड़ से खत्म करने की जो प्रतिबद्धता दिखाई थी, वह वर्ष 2017-18 के बजट में कहीं दिखाई नहीं दी।

नशा तस्करी रोकने के लिए एसटीएफ का गठन तो किया गया, लेकिन सूबे की नशा पीड़ित आबादी के इलाज और उनके पुनर्वास को लेकर बजट में प्रावधान करने का अवसर चूक गई। यह तीनों ही मदें- सेहत, शिक्षा व रोजगार, ऐसी हैं, जिनका प्रसार कर सरकार नशे की लत का शिकार हो रहे युवाओं को बचाने की सार्थक कोशिश कर सकती है।

केंद्रीय समाज कल्याण मंत्रालय के निर्देश पर एम्स की ओर से की गई स्टडी में यह बात सामने आई है कि पंजाब में 1.23 लाख युवक हेरोइन के आदी हो चुके हैं और औसतन 20 करोड़ की ड्रग्स हर रोज पंजाब में इस्तेमाल हो जाती है। इस तरह साल भर में पंजाब में 14,000 करोड़ रुपये का नशा पी लिया जाता है।

 
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पंजाब में नशा करने वालों की तादाद 2.3 लाख

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स्टडी रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई कि हर साल 7,500 करोड़ रुपये सिंथेटिक ड्रग्स खरीदने पर लोग खर्च कर देते हैं, जबकि केवल हेरोइन खरीदने पर 6,500 करोड़ रुपये खर्च कर दिए जाते हैं। कैप्टन सरकार ने सूबे में नशे के कारोबार को चार हफ्ते में समाप्त करने का दावा किया था।

इसके लिए एसटीएफ का गठन किया गया, लेकिन तीन माह बीत जाने के बाद भी कोई बड़ी मछली एसटीएफ के हत्थे नहीं चढ़ी है। एम्स के सर्वे में यह भी पता चला है कि राज्य में नशा करने वालों की तादाद 2.3 लाख है। उनमें 99 प्रतिशत पुरुष और 54 प्रतिशत युवा हैं।

तीन तरह के नशे का है ज्यादा चलन
स्टडी रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि पंजाब में युवा वर्ग तीन तरह का नशा कर रहा है। एक प्राकृतिक नशा यानी शराब, अफीम, भुक्की, चरस, गांजा, स्मैक। वहीं, दूसरे हैं सिंथेटिक नशे- हेरोइन, चिट्टा, ब्राउन शुगर व कोकीन। इसके अलावा तीसरा नशा है मेडिकेटिड, जिसमें पाया गया है कि नशे के आदी 33 फीसदी लोग नशीले टीके, कैप्सूल आदि का इस्तेमाल करते हैं।
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