कई ऐसे पक्षी, जिन्हें हम सिर्फ मैग्जीन, अखबारों और इंटरनेट पर ही देख पाते हैं। उनकी चहचहाहट कैसी होगी, अगर आप यह जानना और सुनना चाहते हैं तो सुखना लेक के रेगुलेटरी एंड पर जाएं। यहां चंडीगढ़ के पर्यावरण विभाग ने प्रकृति परिचय केंद्र स्थापित किया है, जिसमें कई पक्षियों की जानकारी उपलब्ध है।
साथ ही उनकी आवाज भी अपलोड की गई है। भले ही पक्षियों की आवाज मशीनरी से उत्पन्न होती है, लेकिन जब कानों में पड़ती है तो सुखद अहसास करवाती है। प्रकृति परिचय केंद्र में करीब एक दर्जन पक्षियों की जानकारी अपलोड की गई है।
उनके नाम के आगे बटन दबाने पर आप उनकी मीठी-मीठी आवाज भी सुन सकते हैं। इनमें माइग्रेंट और रेजिडेंट बर्ड शामिल हैं। परिचय केंद्र का निर्माण तो साल 2013 में हो गया था, लेकिन ज्यादा लोगों को फिलहाल इसकी जानकारी नहीं है। हालांकि बर्ड फ्लू के बाद से केंद्र में आने वाले पर्यटकों की संख्या में दोगुना इजाफा हुआ है।
और क्या-क्या है
केंद्र में पक्षियों की जानकारियों के अलावा भी बहुत कुछ है। केंद्र में दो कमरे बने हैं। पहले कमरे में सुखना लेक का परिचय है। इसमें उसके इतिहास और उसमें आने वाले बर्ड की जानकारी दी गई है। सुखना, कांसल और नेपली पर बनी एक डाक्यूमेंट्री मूवी है। जिसे देखने के बाद चंडीगढ़ के सबसे खूबसूरत हिस्से का अहसास किया जा सकता है।
मूवी पर्यटकों को नेचर के करीब ले जाएगी। इसी रूम में पक्षियों और उनकी आवाज का सेगमेंट भी है। दूसरे रूम में सुखना वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और उसमें रहने वाले जानवरों की जानकारी है। धीरे-धीरे पर्यटकों को इस स्पॉट के बारे में पता चल रहा है।
इससे पर्यटकों की संख्या में अच्छा-खासा इजाफा हुआ है। रोजाना 250 से 300 पर्यटक आते हैं। अब इसे खोलने का समय भी बढ़ा दिया गया है। पहले समय सुबह नौ से शाम पांच बजे तक था, लेकिन अब इसका समय सुबह छह बजे से लेकर रात दस बजे तक कर दिया गया है। मंगलवार को केंद्र बंद रहता है।