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Report: चुनाव उम्मीदवार खुद को बताते समाजसेवी, निकलते करोड़पति हैं

Sun, 30 Apr 2017 11:48 AM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
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चुनाव उम्मीदवार
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चुनाव लड़ने वाले बहुत से प्रत्याशी ऐसे हैं, जो नामाकंन भरते समय शपथपत्र में खुद को बताते समाजसेवी हो और हकीकत में करोड़पति होते हैं। शपथपत्र में वे अपने व्यवसाय का जिक्र ही नहीं करते। वे खुद को सिर्फ एक समाजसेवी की तौर पर प्रस्तुत करते हैं, लेकिन जब इन दस्तावेज की जांच होती है, तो यही समाजसेवी करोड़पति निकलते हैं। यह खुलासा इलेक्शन कमिशन ऑफ इंडिया की ओर से बीते माह पांच राज्यों में हुए चुनाव के दौरान प्रत्याशियों की ओर से भरे गए अपने शपथपत्र संबंधी दस्तावेज की जांच में हुआ है।
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चुनाव आयोग इस बात से हैरान है कि  चुनाव लड़ने वालाएक समाजसेवी करोड़पति कैसे बन सकता है? इसलिए चुनाव आयोग अब चुनाव नियमों के अंतर्गत फार्म नंबर-26 में संशोधन की तैयारी कर रहा है। सात पेज का यह फार्म एक शपथ पत्र के रूप में होता है, जिसे नामांकन के साथ प्रत्याशी को भरना पड़ता है। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. नसीम जैदी ने बताया कि आयोग वाकई इस बात से हैरान है कि समाजेसवा में लगा एक व्यक्ति चुनाव लड़ता है, ये तो ठीक है, लेकिन वह करोड़पति कैसे बन गया?

यह सोचनीय विषय है। इसलिए आयोग अब फार्म-26 में संशोधन करेगा। इस फार्म में अब प्रत्याशी को ये भी बताना होगा कि समाजसेवी के साथ-साथ आखिरकार उसका कारोबार क्या है? उनके अनुसार इस फार्म के कई कॉलम भी प्रत्याशी खाली छोड़ देते हैं, ये भी गलत है, ऐसा न हो इसके लिए चुनाव आयोग तैयारी में है।
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आयकर विभाग खंगालेगा दस्तावेज

चुनाव उम्मीदवार
इस वर्ष पांच राज्यों उत्तरप्रदेश, पंजाब, उतराखंड, मणिपुर व गोवा में चुनाव हुए। सभी राज्यों में 7121 प्रत्याशियों ने अपना भाग्य अजमाया। इनमें से 2324 प्रत्याशी करोड़पति है, जिन्होंने खुद अपनी आय का ब्यौरा चुनाव आयोग को दिया है, लेकिन जहां कारोबार की बात आती है तो बहुत से करोड़पति खुद को समाजसेवी बताते हैं,

इसलिए चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों केआय के ब्यौरे को आयकर विभाग के पास भेजा है और विभाग ये दस्तावेज खंगाल रहा है। चुनाव आयुक्त डॉ. जैदी के अनुसार इस प्रक्रिया में छह महीने तो लग ही जाते हैं, उसकेबाद आयकर विभाग जो रिपोर्ट देगा, उसके मुताबिक काम किया जाएगा।

नशा-नोट बांटने वालों पर और सख्ती होगी
डॉ. जैदी के अनुसार चुनावों में नशा और नोट बांटने का प्रचलन बहुत ही शर्मनाक है, लेकिन आज भी ऐसा हो रहा है। इसलिए आयोग अब और सख्ती करेगा। इसके लिए कई तरह की प्लानिंग की जा रही है, जिसमें स्पेशल टीमें इस तरह की घटनाओं से निपटेंगी और इस बाबत चार्ज फ्रेम होने पर प्रत्याशी को अयोग्य भी घोषित किया जाएगा।
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