हरियाणा में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की अलग बेंच स्थापित नहीं होगी। हाईकोर्ट के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों वाली समिति ने दक्षिणी हरियाणा में हाईकोर्ट की संवैधानिक बेंच स्थापित करने की जरूरत को उचित नहीं पाया है। समिति ने सीएम मनोहर लाल के अलग बेंच स्थापित करने की मांग का समर्थन न करते हुए अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
रिपोर्ट से सीएम मनोहर लाल को अवगत भी करा दिया गया है। अलग हाईकोर्ट बेंच पर विचार-विमर्श करने के लिए गठित समिति ने सुप्रीम कोर्ट की जजमेंट का भी विस्तार से अध्ययन किया। उसके बाद रिपोर्ट तैयार कर हरियाणा सरकार को सौंपी है।
मुख्यमंत्री दक्षिणी या पश्चिमी हरियाणा में हाईकोर्ट की खंडपीठ चाहते थे और इस मामले पर अप्रैल 2015 में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था। केंद्र ने इसे मई में हाईकोर्ट को भेज दिया था। जिसके बाद जुलाई 2015 में उच्च न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों की समिति गठित की गई थी।
समिति ने व्यापक रूप से इस मुद्दे की जांच की और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत सरकार व केंद्र सरकार को भेजी है। समिति ने कहा है कि चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट उपयुक्त रूप से स्थित है और अलग बेंच स्थापित करने की कोई जरूरत नहीं है।
हाल ही में रिपोर्ट के निष्कर्षों से मुख्यमंत्री को भी अवगत करा दिया गया है। जुलाई 2015 में हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस एसजे वजीफदार के आदेश पर बनाई गई कमेटी में जस्टिस एसके मित्तल, जस्टिस हेमंत गुप्ता, जस्टिस एसएस सरों और जस्टिस राजीव भल्ला शामिल थे। ज्वाइंट रजिस्ट्रार (बजट एंड सेलरी) रेणु कालिया ने कार्यवाहक चीफ जस्टिस के आदेशों का हवाला देते हुए कमेटी के गठन के आर्डर जारी किए थे।
हाईकोर्ट की समिति की रिपोर्ट से सरकार के अलग बेंच स्थापित कराने के प्रयासों को तगड़ा झठका लगा है। चूंकि, मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दक्षिण हरियाणा में हाईकोर्ट की अलग पीठ के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा था। मुख्यमंत्री के अलावा केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने भी इसके लिए मुहिम छेड़े हुए थे। सीएम मनोहर लाल ने अप्रैल 2015 में नई दिल्ली में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मुख्य न्यायाधीशों की बैठक में भी अलग हाईकोर्ट बेंच का मुद्दा उठाया था।