पहलवान नरसिंह यादव डोप प्रकरण की एडीजे कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें जूनियर पहलवान को लेकर बड़ा फैसला सुनाया गया। दरअसल, एडीजे सुनीता ग्रोवर की अदालत से राहत नहीं मिली। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए साफ किया कि कोर्ट के सामने अभी तक ऐसा कोई तथ्य नहीं आया है, जिसके आधार पर अग्रिम जमानत दी जाए।
आरोपी पहलवान के वकील जयभगवान शर्मा का कहना है कि गुरुवार को फैसले की कॉपी मिल जाएगी। इसके बाद सेशन कोर्ट या हाईकोर्ट में अपील करने का फैसला करेंगे। उधर, सीआईए इंस्पेक्टर इंदीवर का कहना है कि अदालत ने आरोपी की याचिका खारिज कर दी है। इसकी कॉपी उन्हें मिल गई है। अब पुलिस किसी भी समय आरोपी को हिरासत में ले सकती है।
अंतरराष्ट्रीय कुश्ती खिलाड़ी नरसिंह यादव के नाडा ने डोप टेस्ट किए थे, जिनमें वे पॉजिटीव पाए गए थे। 27 जुलाई को राई थाने में नरसिंह ने एफआईआर दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उसके खाने या पानी में प्रतिबंधित दवा साजिश के तहत मिलाई गई है। शिकायत में नरसिंह ने दिल्ली के एक जूनियर पहलवान को नामजद किया था।
17 वर्षीय आरोपी पहलवान की ओर से एडीजे सुनीता ग्रोवर की अदालत में अग्रिम याचिका दायर की गई थी, जिस पर बुधवार को कोर्ट में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की बहस के बाद कोर्ट ने शाम तक फैसला सुरक्षित रख लिया। शाम चार बजे अदालत ने फैसला सुनाते हुए अग्रिम जमानत देने से जहां इंकार कर दिया वहीं साफ किया कि याचिकाकर्ता के पास ऊपरी अदालत में अपील करने का अधिकार है।
फंसाया जा रहा जूनियर पहलवान को
नरसिंह यादव
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मामले में नामजद दिल्ली के जूनियर पहलवान के कोच रणवीर सिंह का कहना है कि साई के अंदर सीनियर खिलाड़ियों के कमरे में जाने के लिए जूनियर को अनुमति लेनी पड़ती है। जबकि बड़े पहलवान छोटे पहलवानों से बात तक करना मुनासिब नहीं समझते। ऐसे में कैसे जूनियर पहलवान दूसरे के कमरे या रसोई में जाकर प्रतिबंधित पदार्थ मिला सकता है।
कोच ने यहां तक कहा कि अगर किसी बड़े नेता या पहलवान का हाथ जूनियर पहलवान के सिर पर होता तो उसे इस तरह नहीं फंसाया जाता। इतना ही नहीं, पहले जहां कहा जा रहा था कि नरसिंह की सब्जी में कुछ पदार्थ मिलाया गया है, जबकि नाडा की रिपोर्ट में पेय पदार्थ बताया गया है। इससे साफ है कि कहीं न कहीं गड़बड़ी है।
पूरे मामले में कौन-कौन शामिल हैं, इसलिए हिरासत चाहिए
आरोपी को हिरासत में लेकर प्रतिबंधित दवा बरामद करनी है। साथ में पूरे मामले में कौन-कौन शामिल हैं, यह भी पता लगाया जाना है। इसलिए जूनियर पहलवान को हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है।
-प्रदीप चौधरी, सरकारी वकील, सीआईए
अब तक कुछ भी सिद्ध नहीं पाई है पुलिस
जूनियर पहलवान बेकसूर है। जानबूझ कर उसे फंसाया जा रहा है। नरसिंह की ओर से 27 जुलाई को एफआईआर दर्ज करवाई गई है, जबकि उसका कहना है कि 22 दिन पहले ही उसे पता लग गया था कि उसके खाने में कुछ मिलाया गया है। इसके बावजूद एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई गई। इतना ही नहीं, सीसीटीवी फुटेज में भी अब तक कुछ नहीं मिला है। ऐसे में जूनियर पहलवान की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार की जाए, ताकि वह अपने आपको निर्दोष साबित कर सके।
-जयभगवान शर्मा, आरोपी पक्ष के वकील