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सोनिया ने कुछ ऐसा किया, सुरक्षाकर्मियों में हड़कंप

Sat, 26 Apr 2014 08:23 PM IST
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
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भाषण खत्म होने के बाद सोनिया गांधी लौट रही थीं। तभी अचानक उनका मूड बदला और वह डी की तरफ बढ़ चलीं। इसे देख कर सुरक्षाकर्मियों के हाथ-पैर फूल गए।
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सोनिया डी के एक किनारे पर पहुंचीं और हाथ जोड़ कर लोगों का अभिवादन किया। उसके बाद डी के साथ-साथ चलते हुए दूसरे किनारे तक गईं। सोनिया को करीब से देखने के लिए लोग खासे उत्साहित थे। महिलाओं वाले पंडाल में तो उन्हें देखने के लिए होड़ लग गई।
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कांग्रेसियों को एकजुट कर गईं सोनिया

कांग्रेस प्रधान सोनिया गांधी की रैली संगरूर हलके में बिखरी पड़ी कांग्रेस को एकजुट कर गई। संगरूर हलके में कांग्रेस के चार विधायक अब तक चुनाव प्रचार में खुलकर विजयइंदर सिंगला के साथ नहीं चल रहे थे।

लेकिन रैली में सभी बड़ी तादाद में समर्थक लेकर पहुंचे। सिर्फ धूरी के विधायक अरविंद खन्ना विदेश में होने के कारण नहीं आए। उनके अलावा केवल ढिल्लों, हरचंद कौर, मोहम्मद सदीक, रजिया सुलतान, सुरिंदरपाल सिंह सिबिया समेत सभी हलकों के प्रमुख नेता रैली में पहुंचे।

सुरजीत कौर बरनाला को भी मंच पर जगह

दाना मंडी में हुई रैली के दौरान मंच पर आगे तीन कुर्सियां लगाई गई थीं जिन पर सोनिया गांधी, विजयइंदर सिंगला के अलावा सुरजीत सिंह बरनाला की पत्नी सुरजीत कौर बरनाला सुशोभित थीं।

बरनाला की पार्टी ने पिछले दिनों कांग्रेस के समर्थन का ऐलान किया है। बरनाला हलका उनका अपना गढ़ रहा है। वह यहां से जीत भी चुके हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि इस हलके में बरनाला का वोट बैंक पार्टी के लिए मददगार साबित होगा।

करीब से देख गदगद हुए लोग

सोनिया ने अपने भाषण में स्थानीय मुद्दे उठाकर हर वर्ग के लोगों की नब्ज पकड़ने की कोशिश की। साथ ही स्थानीय मुद्दों पर सरकार को घेरा। किसानों की समस्याओं को उठाते हुए कहा कि  प्रदेश सरकार ने मुफ्त बिजली देने का वादा किया लेकिन यहां तो बिजली मिलती ही नहीं।

मुलाजिमों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला। दलितों के आरक्षित पद तक नहीं भरे गए। दलितों के कल्याण का बजट बहुत कम है, वह भी खर्च नहीं होता।
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गुजरातियों के कंठ आज भी सूखे

मोदी की गुजरात गाथा पर हमला बोलते हुए सोनिया ने कहा कि गुजरात में बड़ी संख्या में गांव हैं, जहां लोग आज भी पानी को तरस रहे हैं। पांच साल तक की उम्र का हर दूसरा बच्चा कुपोषण का शिकार है।

रोजाना 11 रुपये कमाने वाले को वहां गरीबी रेखा से नीचे नहीं माना जाता। 45 हजार एकड़ जमीन एक उद्योगपति को कौड़ियों के भाव बेच दी गई।
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