कारगिल की लड़ाई में शहीद विजय सिंह के फौजी बेटे जोगेंद्र सिंह (24) ने शनिवार सुबह जसबीर कालोनी स्थित निर्माणाधीन मकान में फंदा लगाकर जान दे दी। जोगेंद्र सिंह 17वीं जाट रेजीमेंट अलवर में तैनात था। उसकी छुट्टी 31 मई को खत्म होने वाली थी। उससे पहले ही उसने मौत को गले लगा दिया।
पुलिस का कहना है कि मौके से कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला है। फौजी ने फंदा क्यों लगाया, इस संबंध में परिजन भी कुछ नहीं बता पा रहे हैं। मौत को हादसा मानकर कार्रवाई की गई है। अर्बन एस्टेट थाना प्रभारी प्रह्लाद सिंह ने बताया कि सुंदरपुर निवासी विजय सिंह सेना में कार्यरत थे।
कारगिल की लड़ाई में वे शहीद हो गए थे। उनके तीन बेटे थे। बड़ा बेटा जोगेंद्र सिंह जाट रेजीमेंट में भर्ती हो गया था, जबकि उससे छोटा बेटा लद्दाख में तैनात है। सबसे छोटा बेटा 12वीं कक्षा में पढ़ रहा है। परिवार जसबीर कालोनी में रह रहा है। अलवर में तैनात जोगेंद्र सिंह की अभी शादी नहीं हुई थी। 20 दिन की घर पर छुट्टी आया था।
छुट्टी के चलते परिवार एक अन्य मकान बना रहा था। परिजनों ने बताया कि शनिवार सुबह 7 बजे के करीब जोगेंद्र घर पर यह कहकर गया था कि नए घर में पानी से तराई करने जा रहा है। इसी बीच परिजनों ने देखा कि नए घर में पानी की मोटर तो चल नहीं रही है।
उन्होंने आवाज दी लेकिन जोगेंद्र ने जवाब नहीं दिया। ऊपर जाकर देखा तो वह फंदे पर लटका हुआ था। मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नीचे उतारकर जांच पड़ताल की। इसके बाद परिजनों के बयान दर्ज कर शव पीजीआई के शवगृह में ले जाया गया, जहां शव का कोरोना टेस्ट करवाया गया। अब रविवार को कोरोना रिपोर्ट आने के बाद शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा जाएगा।