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Chandigarh News: कभी मेट्रो तो कभी मोनो, 2019 में छेड़ा था स्काई बस का शिगूफा...अब पॉड टैक्सी

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चंडीगढ़। शहर में वर्ष 2009 से ही बढ़ते यातायात पर चिंता जताई जा रही है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकाला गया। पूर्व सांसद पवन बंसल 2009 में मेट्रो की योजना लेकर आए तो पूर्व सांसद किरण खेर ने वर्ष 2014 में मोनो रेल चलाने की बात कही। चुनाव भी वो इसी वादे पर जीत गईं, लेकिन उनके 10 साल के कार्यकाल में इस पर कोई काम नहीं हुआ। 2019 में चंडीगढ़ पहुंचे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने स्काई बस चलाने की बात कह दी। हकीकत में न कभी मोनो रेल पर काम हुआ, न ही स्काई बस पर। मेट्रो पर 2014 से 2022 तक ब्रेक लगा रहा, फिर प्रशासक के पूर्व सलाहकार धर्मपाल ने मेट्रो प्रोजेक्ट में जान फूंकी और काम शुरू हुआ। अब फिर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने पॉड टैक्सी की चर्चा छेड़ दी है।
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वर्ष 2006
पहली बार चंडीगढ़ प्रशासन ने मेट्रो परियोजना का विचार किया। शहर की बढ़ती आबादी और यातायात जाम को देखते हुए एक बड़े पैमाने पर सार्वजनिक परिवहन विकल्प की आवश्यकता महसूस हुई।

2007-2010
विभिन्न परियोजनाओं पर अध्ययन करके मेट्रो पर शुरुआती स्तर के अध्ययन और रिपोर्ट तैयार की गईं।

2012
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने इस परियोजना के प्रस्ताव पर विचार किया और चंडीगढ़ मेट्रो परियोजना के लिए एक ड्राफ्ट तैयार किया। इस परियोजना को चंडीगढ़, मोहाली और पंचकुला को जोड़ने के लिए प्रस्तावित किया गया।
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2013
विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हुई। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने चंडीगढ़ मेट्रो के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की। रूट का निर्धारण किया। इस रिपोर्ट में चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में मेट्रो नेटवर्क की योजना बनाई गई।

2015
किरण खेर के सांसद बनने के बाद चंडीगढ़ मेट्रो परियोजना की लागत और क्षेत्र की जरूरतों को लेकर पुनर्विचार किया गया। किरण खेर ने इसका विरोध किया और कहा कि इससे शहर की खूबसूरती खराब हो जाएगी। साथ ही कहा कि चंडीगढ़ जैसे छोटे शहर के लिए मेट्रो परियोजना काफी महंगी है।

2017
प्रशासन ने मेट्रो के बजाय अन्य वैकल्पिक परिवहन प्रणालियों, जैसे कि बीआरटीएस व अन्य पर जोर देने की बात कही।

2019
सेक्टर-37 में एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने चंडीगढ़ में डबल डेकर स्काई बस सर्विस शुरू करने की घोषणा कर दी। कहा कि यह स्काई बस सड़क के बीच में एक पिलर पर चलेगी जिससे नीचे ट्रैफिक की समस्या अपनेआप खत्म हो जाएगी।

2022
बढ़ते ट्रैफिक जाम की समस्या को देखते हुए यूटी प्रशासन ने फिर मोबिलिटी प्लान पर काम करना शुरू किया। प्रशासन ने रेल इंडिया तकनीकी और आर्थिक सेवा (राइट्स) कंपनी को सर्वे का काम सौंपा।

नवंबर 2022
एडवाइजरी काउंसिल की बैठक में मेट्रो का मुद्दा गूंजा। पूर्व सांसद सत्यपाल जैन, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन समेत कुछ अन्य सदस्यों ने मेट्रो चलाने की बात कही। किरण खेर ने विरोध किया।

मार्च 2023
ट्राइसिटी में मेट्रो चलाने को लेकर चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा की मंजूरी मिली। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के साथ एक हाइलेवल बैठक में ट्राइसिटी में दो फेज में मेट्रो चलाने को मंजूरी दे दी गई।

जुलाई 2024
राइट्स ने अल्टरनेटिव एनालिटिकल रिपोर्ट में दो फेज में दो कोच की मेट्रो चंडीगढ़ ट्राइसिटी में चलाने की सिफारिश की। तीन कॉरिडोर बनाए। कॉरिडोर-1 न्यू चंडीगढ़ के पारौल से पंचकूला के सेक्टर-28 वाया चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन, कॉरिडोर 2 सुखना लेक से आईएसबीटी जीरकपुर वाया चंडीगढ़ एयरपोर्ट और कॉरिडोर 3 सेक्टर-39 के अनाज मंडी चौक से सेक्टर-26 के ट्रांसपोर्ट लाइट चौक तक है।

सितंबर 2024
युनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (यूएमटीए) की बैठक में प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने मेट्रो की व्यवहार्यता को लेकर सवाल उठाए। अधिकारियों को आदेश दिए कि वह चंडीगढ़ ट्राइसिटी में मेट्रो की बेहतर योजना के लिए समान आकार के शहरों के लिए वित्तीय/आर्थिक व सवारियों की व्यवहार्यता की जांच करें। एक कमेटी का भी गठन किया गया है।
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