पंजाब के मानसा जिले के बुडलाडा में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया जब मरते हुए बुजुर्ग ने खुद को आजाद हिंद फौज का सिपाही 'बोस' बताया। खुद को बोस बताते हुए बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया।
उनके दम तोड़ते ही ये अफवाह वहां फैल गई कि कहीं ये नेताजी सुभाष चंद्र बोस तो नहीं! खबर फैलते ही चारों तरफ हड़कंप मच गया। सूचना फैलते ही लोग उनके दर्शन के लिए जुटने लगे।
यहां ये शख्स कई वर्षों से पिंगलवाड़ा के नजदीक एक कुटिया में रह रहे थे। उनके पिछले जीवन के बारे में वहां रह रहे लोगों को नहीं पता था।
शुक्रवार देर शाम जब उनकी तबीयत बिगड़ी तो उनको अंदेशा हो गया कि उनकी मौत नजदीक है तब उन्होंने खुद को बोस बताते हुए दम तोड़ दिया। क्योंकि नेताजी के बारे में किसी को पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई है। इसलिए बुजुर्ग की बात सुनते ही वहां अफवाह फैल गई कि मरने वाले शख्स नेताजी सुभाष चंद्र बोस हैं।
ये सुनते ही आसपास के लोग उनके दर्शन के लिए उमड़ने लगे। मौके पर उपस्थित लोगों ने जब उनका रिकॉर्ड टटोलना शुरू किया तो मरने वाले शख्स नेताजी के सहयोगी हरि चंद्र बोस निकले।
इन्होंने नेताजी के साथ्ा ही आजाद हिंद फौज में काम किया और उनके साथ अंग्रेजों के समय में जेल में भी बंद रहे। इस बात के पुख्ता सबूत मौके से बरामद हुए। तब मौके पर ही यह घोषणा की गई कि हरि चंद्र बोस का अंतिम संस्कार शनिवार को बुडलाडा के श्मसान घाट में किया जाएगा।