पानीपत। सामान्य बस अड्डा परिसर में सहकारी समिति की बस में धमाके के आरोपी आतंकी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा के खिलाफ हरियाणा पुलिस के दो पूर्व डीएसपी की गवाही कराई।
मामले की अगली सुनवाई 26 सितंबर को होगी। इस मामले में अब तक 52 में से 28 गवाहों की गवाही हो चुकी है। वहीं आतंकी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा को पेशी को लाते वक्त पुलिस का विपरीत दिशा में चलना जीटी रोड पर चलने वाले यात्रियों पर भारी पड़ गया। यहां पर काफी देर तक यातायात बाधित रहा।
अब्दुल करीम उर्फ टुंडा को बुधवार को दिल्ली पुलिस की टीम जिला कोर्ट मेें धमाके के आरोप में लेकर पहुंची। यहां अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश देवेंद्र सिंह की कोर्ट में करीब एक घंटे तक सुनवाई हुई और हरियाणा पुलिस के दो सेवानिवृत्त डीएसपी करतार सिंह निवासी सुखपुरा चौक, रोहतक और आर्य नगर पानीपत निवासी रणधीर सिंह की गवाही हुई। दोनों गवाहों ने अपने-अपने बयान दर्ज कराए। इसके बाद पुलिस टीम अब्दुल करीम उर्फ टुंडा को लेकर वापस तिहाड़ तेज में ले गई।
अब्दुल करीम उर्फ टुंडा की पेशी के दौरान जिला पुलिस और दिल्ली पुलिस की लापरवाही देखने को मिली। पुलिस के कोर्ट में जाने के लिए जीटी रोड पर विपरीत दिशा में चलने से कैदी बस और पुलिस के वाहन दूसरी दिशा में आ रहे वाहनों में फंस गए।
इससे दूसरे वाहन चालकों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। दरअसल अब्दुल करीम उर्फ टुंडा को लेकर दिल्ली पुलिस की टीम बुधवार को पानीपत कोर्ट में पहुंची। पुलिस की पायलट कर रहे कर्मियों ने लघु सचिवालय के सामने कोर्ट में जाने के लिए जीटी रोड पर विपरीत दिशा में अपने वाहन दौड़ा दिए। यहां पर सामने से आ रहे वाहनों में पायलट और कैदी बस समेत दूसरे वाहन फंस गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा में तैनात कर्मियों को नीचे उतरना पड़ा और काफी मशक्कत के बाद रास्ता बनाना पड़ा।
एक फरवरी 1997 को बस स्टैंड पर सहकारी समिति की बस में बम धमाका हो गया था। इसमें कालखा के एक 10 वर्षीय बच्चे माडू की मौत हो गई थी और करीब 20 लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने इसमें मुकदमा दर्ज कर लिया था, लेकिन आरोपी काबू नहीं हो सका था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने गत कई माह पहले नेपाल बॉर्डर के नजदीक अब्दुल करीम उर्फ टुंडा को काबू किया था। पुलिस ने दावा किया था कि अब्दुल करीम उर्फ टुंडा ने पानीपत बस स्टैंड पर बस में धमाका करने की वारदात को कबूूल किया है।