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हरियाणा: फसल अवशेषों का धुआं कोरोना मरीजों पर पड़ सकता भारी, 12 जिलों में सामान्य से ज्यादा वायु प्रदूषण

Sun, 09 May 2021 03:26 PM IST
ajay kumar सोम दत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

यमुनानगर में सबसे खराब स्थिति है। इस समय यमुनानगर में 201, फरीदाबाद 172, गुरुग्राम 139, हिसार 115, जींद 124, पानीपत 129, बहादुरगढ़ 166 माइकोग्राम तक वायु गुणवत्ता सूचकांक पहुंच गया है। जो सेंसटिव लोगों के लिए खतरनाक माना जाता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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फसल अवशेष का धुआं कोरोना मरीजों समेत दमा और हृदय रोगियों की सांसों पर भारी पड़ सकता है। लॉकडाउन के चलते बंद हुए उद्योग धंधों के कारण हरियाणा में वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार हुआ था लेकिन जैसे-जैसे फसल अवशेष जलाए जा रहे हैं, वैसे-वैसे वायु गुणवत्ता सूचकांक स्तर बढ़ रहा है। इससे प्रदेश के 10 जिलों में यह सामान्य से 100 से 200 माइकोग्राम पर पहुंच गया है। 

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यमुनानगर में सबसे खराब स्थिति है। इस समय यमुनानगर में 201, फरीदाबाद 172, गुरुग्राम 139, हिसार 115, जींद 124, पानीपत 129, बहादुरगढ़ 166 माइकोग्राम तक वायु गुणवत्ता सूचकांक पहुंच गया है। जो सेंसटिव लोगों के लिए खतरनाक माना जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऑक्सीजन की कमी के चलते कंसंट्रेटर मंगाए जा रहे हैं ताकि वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन मरीजों को दी जाए। बायोमास के जलने से कार्बन मोनो आक्साइड और मिथेन गैस पैदा होती हैं और ऑक्सीजन की क्षमता को प्रभावित करती हैं। 

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इस बार हरसेक के पास नहीं प्रोजेक्ट, विभाग खुद कर रहा निगरानी

फसल अवशेष जलाने को लेकर हर साल हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (हरसेक) को प्रोजेक्ट दिया जाता था। हरसेक स्पेस के माध्यम से फसल अवशेष जलाने के मामलों की पुष्टि करता था। इस बार कृषि विभाग खुद निगरानी कर रहा है लेकिन इसका असर नहीं दिख रहा है। 

रिकॉर्ड के अनुसार, हर जिलों में रोजाना से चार से पांच मामले सामने आ रहे हैं, जबकि हकीकत में 30 से 35 स्थानों पर अवशेष जलाए जा रहे हैं। हरसेक हिसार के निदेशक डॉ. वीएस आर्य ने बताया कि इस बार यह प्रोजेक्ट उनके पास नहीं है। वहीं, कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक जगमेंद्र नैन ने कहा कि इस पर विभाग की पूरी निगरानी है और किसानों को लगातार जागरूक करते रहे हैं। किसानों पर जुर्माना भी कर रहे हैं।

यहां सामान्य से अधिक प्रदूषण स्तर
यमुनानगर में 201, फरीदाबाद 172, गुरुग्राम 139, फतेहाबाद 125, बहादुरगढ़ 166, नारनौल 150, पानीपत 129, जींद 124, हिसार 115, मानेसर 109, चरखी दादरी 108 और रोहतक 101 माइकोग्राम वायु गुणवत्ता सूचकांक है। वैज्ञानिकों के अनुसार, 0 से 50 को अच्छा, 51 से 100 को मध्यम और 101 से 150 तक को सेंसटिव लोगों के लिए अच्छा नहीं माना जाता। 151 से 200 तक सूचकांक को अनहेल्दी माना जाता है। इससे ऊपर के सूचकांक को खतरनाक माना जाता है।

जीटी बेल्ट के जिलों में हालात सामान्य
चंडीगढ़ समेत जीटी बेल्ट के जिलों में प्रदूषण को लेकर हालात सामान्य हैं। चंडीगढ़ 54, अंबाला 64, भिवानी 90, बल्लभगढ़ 73, पंचकूला 37, कुरुक्षेत्र 83, करनाल 59, कैथल 69 और सिरसा का वायु गुणवत्ता सूचकांक 90 माइकोग्राम है।

प्रदूषण मरीजों के लिए घातक
वायु प्रदूषण सभी के लिए खतरनाक है। खासकर इससे फेफड़े, दमा और हृदय रोगियों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं, जहां तक कोरोना के मरीजों की बात है तो, उनको ऑक्सीजन की पहले से अधिक जरूरत है। अवशेष जलाने से वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन की क्षमता प्रभावित होती है। इसलिए ऐसा नहीं करना चाहिए। बढ़ता प्रदूषण मरीजों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। -डॉ. अभिनव डागर, पल्मोनरी विशेषज्ञ, केसीजीएमसी, करनाल।
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