डॉ. श्वेता अपने परिवार के साथ।
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वहीं दूसरी तरफ इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को निभाते हुए डॉक्टर काजल एक अच्छी मां और अच्छी पत्नी के तौर पर भी खुद को साबित कर रही हैं। उनकी दोनों बेटियां रिया और समायरा व उनके पति तेजिंदर शर्मा की देखभाल का जिम्मा डॉक्टर काजल के कंधों पर ही है। उन्होंने बताया कि बच्चों की इस समय ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है। ऑनलाइन पढ़ाई में आने वाली दिक्कतों को दूर करने की जिम्मेदारी भी उनके पास है। ट्रॉमा सेंटर और घर की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बना पाना मुश्किल हैं लेकिन नामुमकिन नहीं।
दोहरी जिम्मेदारी को हंसकर निभाती हैं डॉ. चारू
जीएमएसएच-16 में कई सालों तक एनेस्थीसिया विभाग की कमान संभालते हुए डॉ. चारू ने खुद को एक सफल नारी के तौर पर पेश किया। जहां तक घर की जिम्मेदारी की बात है तो इनके बेहतर तालमेल और प्यार का ही नतीजा है कि ये खुद एक जिम्मेदार अधिकारी हैं और इनके पति डॉक्टर नीरज ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं, वहीं बेटा तुषार बंगलूरू में और बेटी शिरीन गुप्ता जीएमसीएच 32 में डॉक्टर हैं।
कोविड के दौरान संक्रमण की चपेट में आ चुकी डॉक्टर चारू ने एनएचएम नोडल जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी मिलने पर खुशी जाहिर की और उसके कार्यों को बखूबी अंजाम देने में जुटी हुई हैं। एक बार संक्रमण की चपेट में आ चुकी डॉक्टर चारू अपने परिवार की सेहत को लेकर बेहद सचेत रहती हैं। ऐसे में वे अपनी व्यस्तता के बीच भी अपने परिवार के लिए अपने हाथों से खाना बनाकर ही ड्यूटी पर जाती हैं। उनका मानना है कि परिवार स्वस्थ व खुश हो तो व्यक्ति निश्चिंत होकर अपना हर फर्ज पूरा कर सकता है। मौजूदा समय में डॉ. चारू एनएचएम के साथ ही कोविड से जुड़े महत्वपूर्ण कई अन्य कार्यों में भी अहम भूमिका सफलतापूर्वक निभा रही हैं।
कोविड के दौरान जब लॉकडाउन हुआ तो कई मरीजों के खाने पर संकट आ खड़ा हुआ। उस दौरान पीजीआई की संयुक्त चिकित्सा अधीक्षक और हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर तैनात डॉ. श्वेता पीजीआई में भर्ती मरीजों के लिए मां अन्नपूर्णा के रूप में नजर आईं।
उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना लॉकडाउन के दौरान पीजीआई में भर्ती सैकड़ों मरीजों के लिए भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करवाई। यह क्रम अब भी जारी है। इसके साथ ही डॉक्टर श्वेता के जिम्मे मेन ऑपरेशन थियेटर कांप्लेक्स के संचालन की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
डॉक्टर श्वेता के पति डॉ. आशीष पीजीआई में ही कार्यरत हैं। वहीं बेटे अक्षत की जिम्मेदारी भी श्वेता के ही कंधों पर है। अपनी तमाम व्यस्तता के बावजूद भी डॉक्टर श्वेता अपने घर के बड़े की बातों को नजरअंदाज नहीं करती। ऊंचे ओहदे पर होने के बावजूद भी वह बड़ों को सम्मान और छोटों को प्यार देना नहीं भूलतीं।