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1857 की क्रांति में मारे गए सैनिकों के परिजनों तक पहुंचने की उम्मीद जगी, मिले थे 282 नरकंकाल

Tue, 02 Oct 2018 12:47 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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कालियांवाला खूह अजनाला
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1857 की क्रांति के दौरान मारे गए सैनिकों के अवशेष अजनाला (अमृतसर) के एक गुरुद्वारे से मिले थे, जिनकी पड़ताल और विधिवत रिसर्च प्रोफेसर जेएस सहरावत कर रहे हैं। रिसर्च के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य अब तक सामने आ चुके हैं लेकिन फंड के अभाव में यह रिसर्च बंद हो चुकी थी। इस संबंध में अमर उजाला ने 28 सितंबर को ‘1857 की क्रांति में मारे गए थे पंजाब के कई सैनिक’ शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
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खबर के प्रकाशन के बाद केंद्र सरकार ने मामले का संज्ञान लिया और रिसर्च को आगे बढ़ाने के लिए प्रो. सहरावत को 30.58 लाख रुपये का फंड जारी कर दिए हैं। प्रो. सहरावत का कहना है कि फंड मिलने से उन्हें बड़ी राहत मिली है। अब वह बंद रिसर्च को दोबारा एक-दो दिन में शुरू कर देंगे। हालांकि उनका कहना है कि रिसर्च के लिए यह रकम पर्याप्त नहीं है। अभी और फंड की जरूरत पड़ेगी।

उनका कहना है कि रिसर्च को आगे बढ़ाने के लिए हर तरफ से उन्हें मदद की जरूरत है ताकि 1857 की क्रांति में मारे गए सैनिकों के परिजनों को न्याय मिल सके। वह कहते हैं कि रिसर्च के जरिए वह यह भी बता देंगे कि मारे गए लोग किन परिवारों और किस जाति के थे। उनके परिजन कौन हैं?
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ब्रिटिश कमिश्नर की किताब की कई चौंकाने वाले खुलासे

कालियांवाला खूह अजनाला
मालूम हो कि ब्रिटिश कमिश्नर हेनरी लॉरेंस ने अपनी किताब ‘द क्राइसिस इन पंजाब : टेंथ मई टू फाल ऑफ देहली’ में कई चौंकाने वाली बातें लिखी थीं। उसी आधार पर वर्ष 2014 में अमृतसर के अजनाला स्थित गुरुद्वारे के नीचे बने कुएं से 1857 की क्रांति में मारे गए 282 सैनिकों के कंकाल मिले थे। इनमें 84 खोपड़ी, नौ हजार दांत व सैकड़ों हड्डियां शामिल थीं।

कंकाल पर रिसर्च के लिए पूंजी चाहिए थी लेकिन नहीं मिल पाई। प्रोफेसर जेएस सहरावत ने आईआईटी रुड़की, हैदराबाद, बीरबल साहनी पुरावनस्पति विज्ञान संस्थान लखनऊ, कॉलेज ऑफ डेंटल साइंसेज धारवाड़ कर्नाटक से संपर्क किया। इसके अलावा जर्मनी और अमेरिका के विश्वविद्यालयों से भी संपर्क साधा। वहां से कुछ मदद मिली। कुछ रकम प्रो. सहरावत ने अपनी जेब से खर्च की। प्रारंभ में 30 दांतों का डीएनए कराया और रिजल्ट पॉजिटिव आने लगे।

इसमें यह खुलासा हुआ कि मारे गए सैनिक पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बंगाल, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश के थे, जो 26 इन्फ्रेंट्री बटालियन मीर क्षेत्र से भर्ती हुए थे। यहां तक पता लगने के बाद बजट का अभाव आ गया। रिसर्च अंतिम नतीजों तक नहीं पहुंच पाया तो इस मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद भारत सरकार के विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड व विज्ञान और प्रौद्योगिकी डिपार्टमेंट ने 30.58 लाख रुपये जारी किए हैं।
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