सेक्टर-15 के शिशु गृह में भारी अव्यवस्था के कारण छह बच्चे डिलेड माइल्ड स्टोंस के शिकार हो गए और अस्पताल में उनका उपचार चल रहा है।
यहां दो कमरों में 47 बच्चे ‘कैद जैसी जिंदगी’ जी रहे हैं और उन्हें चहलकदमी तक के लिए जगह नहीं मिलती। ऐसे में यदि इन बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास नहीं हुआ तो उन्हें गोद लेने में दिक्कतें आ सकती हैं।
हैरानी की बात यह है कि इन 47 बच्चों के रहने के लिए जितनी जगह नहीं है, उससे ज्यादा लाइब्रेरी ने जगह घेर रखी है।
डाक्टरों के अनुसार, बच्चों को मसाज व पर्याप्त डाइट के साथ-साथ खेलने के लिए पर्याप्त जगह भी चाहिए, ताकि उनका शारीरिक व मानसिक विकास हो सके।
क्या है डिलेड माइल्ड स्टोंस
बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में देरी को डिलेड माइल्ड स्टोंस कहते हैं। इसके चार प्रकार हैं...
ग्रौस : उठना, चलना, बैठना
फाइन मोटर : पकड़ना, लिखना, पेन उठाना
लैंग्वेंज : बच्चे बाबा, पापा, मामा, मम्मी बोलना सीखते हैं
सोशल : स्माइल करना, सामान उठाना, उसे इधर-उधर करना आदि
खाली नहीं किया को लाइब्रेरी में रख दूंगी बच्चे
शिशु गृह की सुपरिंटेंडेंट ने बताया कि पहले बच्चों की संख्या कम थी। अब संख्या भी बढ़ी है और बच्चे बड़े भी हो रहे हैं। उन्हें चहलकदमी के लिए जगह भी चाहिए, जो यहां नहीं है।
लाइब्रेेरी को दूसरी जगह शिफ्ट करने की उपायुक्त और हायर एजुकेशन से कई बार मांग कर चुकी हूं, लेकिन एक साल से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है।
लाइब्रेरी को खाली करने के लिए 10 दिनों का समय दिया गया था और दसवां दिन 17 मार्च को फिर पूरा हो रहा है।
इस अवधि में यदि लाइब्रेरी को शिफ्ट नहीं किया गया तो 18 मार्च को बच्चों को इसी लाइब्रेरी में रख दिया जाएगा। बच्चों के ग्रोथ का सवाल है। हम उनकी जिंदगी से खिलवाड़ नहीं कर सकते।