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Chandigarh News: गलसुआ से स्थिति गम्भीर, पूरा का पूरा परिवार हो रहा संक्रमित

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चंडीगढ़। शहर में गलसुआ के बढ़ते मामलों पर काबू नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि संक्रमित मरीज की संख्या बढ़ने के साथ संक्रमण की गंभीरता भी बढ़ती जा रही है। शहर में इसके मरीजों की संख्या 130 पर आ गई है। चिंता की बात यह है कि अस्पतालों की ओपीडी में कई परिवार के सभी सदस्य संक्रमण की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मुख्य कारण लक्षण सामने आने और संक्रमण की जानकारी मिलने के बीच मरीज का परिवार के अन्य सदस्यों से संपर्क होना है। ऐसे में जरूरी है कि चेहरे, गले, कान या गले में किसी भी प्रकार के बदलाव नजर आने दर्द होने, सूजन आने पर बिना देर किए डॉक्टर की सलाह लें। ऐसा कर संक्रमण को शुरुआती दौर में रोककर अन्य सदस्यों को चपेट में आने से सुरक्षित किया जा सकता है। बाल रोग विशेषज्ञ व आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आरएस बेदी का कहना है कि संक्रमण का शिकार होने वाले बच्चों को दर्द के साथ सूजन की शिकायत सबसे ज्यादा सामने आ रही है। ज्यादातर परिजन सूजन को देखकर बच्चे को सर्जन के पास ले जा रहे हैं। जहां से रेफर होकर वे बच्चों के डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं। बालरोग विशेषज्ञ डॉ. सद्भावना पंडित का कहना है कि इस मर्ज से बचाव का सबसे आसान तरीका बच्चों को तय समय पर इसका टीका लगवाना है।
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इनसेट-
5 वर्षों में शहर में गलसुआ के मामले
वर्ष केस
2019- 0
2020- 0
2021- 1
2022- 2
2023- 130
इनसेट-
तीन तहीने से स्थिति हुई गंभीर
महीना केस
अक्टूबर 2023- 6
नवंबर 2023- 38
दिसंबर 2023- 55
इनसेट-
गलसुआ आप भी जान लें
गलसुआ या मम्प्स एक संक्रामक रोग है, जो एक वायरस के कारण होता है। यह खांसने और छींकने से आसानी से फैलता है। सूजन आने के 1-2 दिन पहले से लेकर 5 दिन बाद तक यह रोग फैल सकता है।
इनसेट-
इन लक्षणों पर करें गौर
बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान, भूख न लगना इसके शुरुआती लक्षण हैं और फिर 2-3 दिनों के बाद कान या जबड़े के नीचे ग्रंथियों में सूजन आ जाती है, जो एक तरफ या दोनों तरफ हो सकती है।
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इनसेट-
इसका रखें ध्यान
- लक्षण सामने आते ही बच्चे को घर के अन्य बच्चों के संपर्क में न आने दें।
-खांसते या छींकते समय नाक और मुंह को रुमाल या टिशू से ढक कर रखें।
- ऐसी चीजें साझा न करें जिन पर लार लगी हो जैसे पानी की बोतलें या कप।
- सूजन शुरू होने के 5 दिन बाद तक अन्य लोगों के संपर्क से बचना चाहिए।
- मास्क पहने रहें। टीकाकरण ही बचाव का एकमात्र प्रभावी तरीका है।
- 9 महीने, 15 महीने और 4-5 वर्ष पर एमएमआर की 3 डोज जरूरी हैं।
- गर्भवती महिलाएं संक्रमित व्यक्ति से दूर रहें।
- गर्भवती महिलाएं एमएमआर वैक्सीन जरूर लगवाएं।
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