चंडीगढ़। जीएमएसएच-16 की ओपीडी में मरीजों की सहूलियत के लिए प्रत्येक तल पर दवा काउंटर खोल दिए गए हैं ताकि मरीज ओपीडी में अपने डॉक्टर को दिखाने के बाद सरकारी दवा ले सकें। लेकिन मरीजों की बेहतरी के लिए शुरू की गई यह योजना शुरुआती दौर में ही धराशायी नजर आ रही है। आलम यह है कि सरकारी दवाओं की कमी इस सुविधा के विस्तार में रोड़ा बन रही है। ओपीडी में चंद दवाओं के बल पर ब्रांडेड दवाओं से टक्कर लेने का प्रयास किया जा रहा है। शनिवार को नेत्ररोग की ओपीडी के काउंटर पर महज एक सरकारी आई ड्रॉप के बल पर मरीजों के मर्ज ठीक करने का प्रयास किया जा रहा था। अन्य काउंटर पर भी स्थिति ऐसी ही है। बता दें कि स्वास्थ्य सचिव के निर्देश पर सरकारी अस्पतालों में ब्रांडेड दवाएं लिखने पर रोक लगाई गई है। डॉक्टरों को अब सिर्फ जेनेरिक दवाएं ही लिखनी हैं। वहीं सरकारी आपूर्ति की दवाएं मरीजों को देनी हैं। ऐसा न करने पर ईएनटी विभाग की एक डॉक्टर पर कार्रवाई की जा चुकी है। ऐसे में डॉक्टर परेशान हैं कि बिना दवाओं के वे मरीजों का इलाज कैसे करें। वहीं मरीज परेशान हैं कि वे बिना प्रिस्क्रिप्शन के दवाएं कैसे लें। डॉक्टरों और कर्मचारियों का कहना है कि जब तक सरकारी अस्पताल में दवाएं नहीं उपलब्ध होंगी तब तक ब्रांडेड दवाओं की खरीद नहीं रूकेगी। व्यवस्था में बदलाव के लिए अस्पताल प्रशासन को दवाओं के भरपूर स्टॉक मेनटेन करने होंगे।
नेत्र और मनोरोग में दवाओं की कमी
अस्पताल की ओपीडी बिल्डिंग में चौथे तल पर त्वचा रोग की ओपीडी में अलग से दवा काउंटर बनाया गया है। त्वचा के साथ ही नेत्ररोग विभाग के मरीज अपने डॉक्टर को दिखाने के बाद उसी काउंटर से दवाएं ले रहे थे, लेकिन ज्यादातर मरीजों को सभी दवाएं नहीं मिल पा रही थीं। सबसे ज्यादा परेशान नेत्ररोग वाले मरीज थे, क्योंकि उस काउंटर पर नेत्ररोग से संबंधित महज एक प्रकार की आई ड्रॉप ( सोडियम क्रॉमोग्लिकेट आई ड्रॉप्स ) उपलब्ध थी जबकि मरीज अगल-अलग परेशानी लेकर वहां आए हुए थे। वहीं मनोरोग विभाग के मरीजों को भी बाहर से ही दवाएं लेनी पड़ रही थी, क्योंकि उनकी दवाएं भी अस्पताल में मौजूद नहीं हैं।
दवा पर सरकारी आपूर्ति का मुहर ही नहीं
अस्पताल में पिछले दिनों लोकल पर्चेज के नाम पर सैम्पल की दवाओं की आपूर्ति का मामला सामने आ चुका है। इसके बावजूद दवाओं की आपूर्ति को लेकर अनदेखी का आलम है। स्थिति यह है कि फार्मासिस्ट अब भी मरीजों को बिना हॉस्पिटल सप्लाई की मुहर लगी दवाएं दे रहे हैं।
कोट- ब्रांडेड दवाओं पर रोक के लिए जेनेरिक दवा लिखने के साथ ही मरीजों को प्रत्येक ओपीडी फ्लोर पर दवा देने की व्यवस्था की जा रही है। यह व्यवस्था सभी ओपीडी फ्लोर पर होगी ताकि मरीज डॉक्टर को दिखाकर बाहर निकलते ही वहीं से दवा ले सके।
-यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव