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सिप्पी सिद्धू हत्याकांड : कल्याणी के खिलाफ चार मई को तय होंगे आरोप

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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के वकील व राष्ट्रीय निशानेबाज सुखमनप्रीत सिंह सिद्धू उर्फ सिप्पी सिद्धू हत्याकांड लगातार सुर्खियों में है। इस मामले में आरोपी जज की बेटी कल्याणी सिंह को राहत मिलने के बजाय हाईकोर्ट से उसकी याचिका पहले ही रद्द हो चुकी है, जिसके चलते अब सीबीआई कोर्ट में उस पर आरोप तय होने थे लेकिन सीबीआई की नई जज ने मामले में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान केस को समझने के लिए आखिरी बार अगली तारीख दे दी है। अब मामले में आरोपी कल्याणी पर चार मई को आरोप तय होंगे। जज ने खुद अपने आदेश में शिकायतकर्ता पक्ष की दलीलों के आधार पर लिखा कि आरोपी पक्ष जानबूझकर इस मामले में देरी कर रहा है ताकि आरोप तय न हों।
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बता दें कि वर्ष 2015 में सिप्पी सिद्धू की सेक्टर-27 स्थित पार्क में गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। पोस्टमार्टम के दौरान सिप्पी सिद्धू के शरीर से चार गोलियां निकली थीं। हालांकि, पहले तो इस मामले में कोई आरोपी गिरफ्तार नहीं हो सका था लेकिन बाद में इस मामले की जांच सीबीआई को ट्रांसफर कर दी गई थी। इसके बाद सबूतों के आधार पर सीबीआई ने महिला जज की बेटी कल्याणी सिंह को इस हत्याकांड में गिरफ्तार किया था और कोर्ट में जांच टीम ने दावा किया कि आरोपी की ओर से भी गोली चलाई गई थी। इस हत्याकांड में सीबीआई ने मुख्य आरोपी कल्याणी सिंह को ही बनाया और उसके खिलाफ वर्ष 2022 में चार्जशीट दायर की गई। सीबीआई की इस चार्जशीट में कुल 84 गवाह बनाए गए। कई महीनों बाद आरोपी कल्याणी को सीबीआई कोर्ट से जमानत मिली थी, जबकि सीबीआई ने कोर्ट में दायर अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि सिप्पी सिद्धू और कल्याणी क्लोज रिलेशनशिप में थे और दोनों एक-दूसरे से शादी भी करना चाहते थे लेकिन सिप्पी के परिजनों ने शादी से इन्कार कर दिया था। सीबीआई ने कोर्ट में दिखाए दस्तावेजों में यह भी दावा किया था कि शादी से इन्कार होने के बाद सिप्पी ने कल्याणी की कुछ आपत्तिजनक फोटो परिवार और दोस्तों के बीच साझा कर दी थी जिसके चलते इन दोनों के बीच अनबन हुई थी। इसी कारण सिप्पी की हत्या को वारदात अंजाम दिया गया था। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने सीबीआई कोर्ट के सामने मामले में अगली तारीख देने का विरोध किया लेकिन खुद जज ने कहा कि इस मामले में पहले ही काफी देरी हो चुकी है, इसलिए अंतिम बार मामले में 4 मई तक सुनवाई स्थगित की जाती है।
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