अब विदेशों में पहचान की दुविधा के कारण सिखों को मुश्किलें नहीं होंगी। इनके हल के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से वीरवार को बहादुरगढ़ में जत्थेदार गुरचरन सिंह टोहड़ा इंस्टीट्यूट में आयोजित बैठक में सिख धर्म के विभिन्न पहलुओं को दर्शाता विशेष दस्तावेज जारी किया गया। एसजीपीसी प्रधान गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने इसे जारी किया।
लोंगोवाल ने बताया कि अंग्रेजी में तैयार इस अहम दस्तावेज में सिख धर्म के इतिहास के अलावा सिख पहचान, सिखों के विदेशों में बसने के प्राथमिक दौर संबंधी जानकारी, सिखों की विश्वस्तरीय प्राप्तियों, विदेशों अंदर वर्तमान स्थिति, कारोबार, सिख सभ्याचार की संपन्नता, सिखों के अन्य धर्मों के लोगों से भाईचारक संबंधों संबंधी जानकारी दी गई है। इसमें पहली विश्व जंग से लेकर वर्तमान समय तक सिखों के इतिहास और विश्वस्तरीय प्राप्तियों का जिक्र किया गया है।
इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक, सामाजिक, व्यापारिक, प्रशासनिक व धार्मिक क्षेत्र से संबंधित शख्सियतों के जिक्र को भी इसमें विशेष स्थान दिया गया। विदेशों में पुरातन समय से सिख गुरुद्वारों की स्थापना और उनकी ओर से सरबत के भले के लिए डाले योगदान को भी दर्शाया गया है।
उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी सिखों के मसलों को लेकर गंभीर है। इसके तहत विदेशों में सिख पहचान की दुविधा के हल के लिए प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस विशेष दस्तावेज को विभिन्न देशों की एंबेसियों, सरकारों तक भेजा जाएगा। इसकी कॉपी सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के दर्शन के लिए आने वाले हर विदेशी नुमाइंदे को भी दी जाया करेगी।