फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh News: ब्रिटेन में सिखों की बढ़ रही असुरक्षा, 49 प्रतिशत नस्लीय नफरत से चिंतित

विज्ञापन
विज्ञापन
-11वीं ब्रिटिश सिख रिपोर्ट ने खोली सिख-विरोधी नफरत की परतें
विज्ञापन

-रिपोर्ट में सिख-विरोधी भावनाओं पर जताई चिंता, सामाजिक व राजनीतिक स्तर तक असर
-
सुरिंदर पाल
जालंधर। ब्रिटेन की संसद में पेश 11वीं ब्रिटिश सिख रिपोर्ट ने देश के बहुसांस्कृतिक ताने-बाने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन में रहने वाले 49 प्रतिशत सिख बढ़ती सिख-विरोधी भावनाओं, नस्लीय नफरत और कट्टर सोच के कारण खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यह चिंता केवल हालिया घटनाओं की देन नहीं बल्कि दशकों पुराने नस्लीय हमलों और हाल के वर्षों में उभरी नई किस्म की नफरत का परिणाम है।
ब्रिटेन में सिखों पर नस्लीय हमलों का इतिहास 1970 और 1980 के दशक से जुड़ा है। उस दौर में साउथहॉल, स्मेथविक और वेस्ट मिडलैंड्स जैसे इलाकों में सिखों और अन्य एशियाई समुदायों पर खुलेआम हमले, दुकानों में तोड़फोड़ और गुरुद्वारों के बाहर धमकियों की घटनाएं सामने आती रहीं। इन घटनाओं ने समुदाय के भीतर असुरक्षा की गहरी भावना पैदा की जिसकी छाया आज भी बनी हुई है। हाल ही में 15 वर्षीय सिख बच्ची को गैंग द्वारा निशाना बनाए जाने की कोशिश ने इस चिंता को और गहरा कर दिया।
विज्ञापन


9/11
के बाद गलत पहचान का दंश

11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद सिखों को अक्सर गलत पहचान का शिकार होना पड़ा। दाढ़ी और पगड़ी के कारण उन्हें कट्टरपंथ से जोड़कर देखा गया जिससे सार्वजनिक अपमान, शारीरिक हमले और शिक्षा व रोजगार में भेदभाव की शिकायतें बढ़ीं। सामुदायिक संगठनों का कहना है कि ऐसे कई मामलों की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं हो पाई। रिपोर्ट बताती है कि बीते एक दशक में सिख-विरोधी घटनाओं ने नया रूप ले लिया है। नफरत अब सड़कों तक सीमित नहीं रही बल्कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैल रही है। फर्जी खबरें, सिख इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करना और घृणास्पद भाषा समुदाय के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। सर्वे में शामिल 50 प्रतिशत सिखों ने ऑनलाइन गलत सूचना को गंभीर खतरा बताया है।

राजनीतिक प्रतिनिधित्व से असंतोष
सिखों की चिंता सामाजिक दायरे से आगे बढ़कर राजनीतिक स्तर तक पहुंच गई है। रिपोर्ट के अनुसार 46 प्रतिशत सिख मौजूदा राजनीतिक प्रतिनिधित्व से संतुष्ट नहीं हैं। 2024 के आम चुनावों में लेबर पार्टी की ओर झुकाव के बावजूद अब राजनीतिक दलों पर भरोसा कमजोर पड़ता दिख रहा है। सिख मतदाता अब नीतियों के साथ-साथ सुरक्षा, सम्मान और पहचान को प्राथमिकता दे रहे हैं। ब्रिटिश सेना में सिखों के ऐतिहासिक योगदान के बावजूद असंतोष बना हुआ है। 81 प्रतिशत सिख मानते हैं कि सेना में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है लेकिन 80 प्रतिशत का कहना है कि नस्लवाद और भेदभाव आज भी भर्ती और तरक्की में बाधा हैं।
विज्ञापन


बहुसांस्कृतिक पहचान के लिए भी बड़ा खतरा
ब्रिटिश सिख रिपोर्ट के चेयरमैन जसवीर सिंह के अनुसार सिख समुदाय लंबे समय से आत्मविश्वासी रहा है लेकिन बढ़ती सिख-विरोधी नफरत ने नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। रिपोर्ट का निष्कर्ष साफ है यदि नस्लीय भेदभाव और सिख-विरोधी भावनाओं को गंभीरता से नहीं लिया गया तो यह केवल सिख समुदाय ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन की बहुसांस्कृतिक पहचान के लिए भी बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

हालिया घटनाएं
-अगस्त 2025 में वॉल्वरहैम्पटन के पास दो बुजुर्ग सिख पुरुषों पर दिनदहाड़े हमला, पगड़ी जबरन उतारी गई।
-ऑल्डबरी (वेस्ट मिडलैंड्स) में 20–25 वर्षीय सिख महिला से यौन हमला, घृणा अपराध दर्ज।
-होम ऑफिस के अनुसार इंग्लैंड और वेल्स में मार्च 2025 तक 1,15,990 घृणा-आधारित अपराध दर्ज।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें