वर्ष 2003 में जारी नानकशाही कैलेंडर पर विवाद और गहरा गया है। सिख प्रतिनिधियों ने इसे बंद करने की मांग की है। इस कैलेंडर के कारण सिख कौम में धार्मिक कार्यक्रमों को आयोजित करने संबंधी पैदा हुए विवादों से संत समाज नाखुश है।
इसे लेकर सोमवार को गुरमति सिद्धांत प्रचारक संत समाज ने बैठक कर बिक्रमी कैलेंडर लागू करने की मांग की। साथ ही इस संबंध में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को मांग भी सौंपा। बैठक की अध्यक्षता दमदमी टक्साल के मुखी बाबा हरनाम सिंह धुम्मा ने की।
इस दौरान फैसला लेकर मांग की गई है कि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार नानक शाही मूल कैलेंडर को रद्द करके रिवायती बिक्रमी कैलेंडर को लागू करें। ताकि सिख कौम में गुरु साहिबों के साथ संबंधित दिवस आयोजित करने में आ रही मुश्किलों को हल किया जा सके।
इस संबंध में संत समाज के नेताओं ने एक ज्ञापन भी श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह को सौंपा। इस मामले पर ज्ञानी गुरबचन सिंह ने कहा कि संत समाज के ज्ञापन पर विचार चर्चा पांच सिंह साहिबान की होने वाली अगली बैठक में लिया जाएगा और जो भी फैसला बैठक में होगा उस के अनुसार ही अगले आदेश जारी होंगे।
दूसरी ओर दमदमा साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी केवल सिंह के नेतृत्व वाले पंथ तालमेल दल ने एक पत्र श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को भेजा है। इस पत्र में संगठन ने मांग की है कि सख्ती से नानकशाही 2003 वाला मूल कैलेंडर ही लागू किया जाए।
एक अन्य सवाल के जवाब में जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब ने पांच सिंह साहिब की बैठक में दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी बलवंत सिंह के शामिल होने के संबंध में कहा कि पांच सिंह साहिबान की बैठक में सिर्फ पांच तख्त साहिबों के जत्थेदार ही शामिल होंगे।
संत समाज की हुई बैठक में बाबा हरनाम सिंह धुम्मा, बाबा सुखचैन सिंह धरमपुरा, बाबा बलबीर सिंह मुखी बुड्डा दल 96 करोड़ी, बाबा बलजिंदर सिंह राडा साहिब व चालीस के करीब अलग अलग सिख संगठनों के मुखी शामिल हुए थे।