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Chandigarh News: सर्च ऑपरेशन के बाद थाने पहुंचे एसआई को पड़ा दिल का दौरा, मौत

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चंडीगढ़। सेक्टर-26 थाने में तैनात एसआई महिंद्र राणा (53) की शुक्रवार देर रात दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। वह ड्यूटी पर थे और सर्च ऑपरेशन के बाद थाने लौटे थे। थाने में ही अचानक तबीयत बिगड़ी और जब तक अन्य पुलिसकर्मी उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना से पुलिस महकमा शोकाकुल है।एसआई महिंद्र राणा की शुक्रवार रात ईओ की ड्यूटी पर थे। रात को पीसीआर पर कॉल चली कि एक काले रंग की रेंज रोवर कार में सवार दो युवक पिस्टल लेकर सेक्टर-26 के किसी क्लब के बाहर घूम रहे हैं। सूचना पाकर महिंद्र राणा और उनकी टीम कार सवार युवकों की तलाश में जुट गई। देर रात तक पुलिस टीम रेंज रोवर सवार युवकों को सेक्टरों में तलाशती रही लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला।
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एक रेंज रोवर कार सेक्टर-7 में पकड़ी गई, मगर वह कार अलग थी। नवनियुक्त सेक्टर-26 थाना प्रभारी एश्वर्या सिंह, डीएसपी और अन्य अफसर मौके पर पहुंचे और एसआई महिंद्र से जानकारी ली। इसके बाद वह थाने में थके हुए पहुंचे। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। एसआई महिंद्र के साथी पुलिसकर्मियों का कहना है कि वह काफी फिट थे और पहले उन्हें कभी कोई तकलीफ नहीं हुई।
उनका सर्विस रिकार्ड भी काफी अच्छा था। वह सेक्टर-26 पुलिस लाइन में ही रहते थे। एसआई महिंद्र के तीन बच्चे हैं। एक बेटा निजी सेक्टर में नौकरी करता है और दूसरा पुर्तगाल में है जबकि बेटी की हाल ही में शादी हुई है। एसआई महिंद्र सिंह का अंतिम संस्कार रविवार को किया जाएगा। बता दें कि हाल ही में बीते 17 जून को सेक्टर-29 ट्रैफिक पुलिस लाइन में मुलाजिमों के लिए एक शारीरिक जांच शिविर लगाया गया था। इसमें सामने आया था कि कई मुलाजिम उच्च रक्तचाप समेत अन्य बीमारियों से ग्रसित हैं।
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तनाव में काम कर रहे मुलाजिम, हम कितनों की देंगे बलि : एसएसपी
एसआई महिंद्र राणा की मौत के बाद शनिवार को एसएसपी कंवरदीप कौर ने सभी डीएसपी स्तर के अधिकारियों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग कर पूछा कि पिछले छह महीने में पुलिसकर्मियों के लिए कितनी कल्याणकारी बैठकें की गईं हैं। कहा कि पुलिस मुलाजिमों की छुट्टी, वित्तीय या पारिवारिक समस्याएं हो सकती हैं, जिन्हें सुना जाना चाहिए। मुलाजिमों के कल्याण पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। मुलाजिम तनाव में काम कर रहे हैं और हम कितने मुलाजिमों की बलि देंगे। मुलाजिमों की वास्तविक समस्याएं हल करने की ओर ध्यान देने की जरुरत है।
डीएसपी स्तर के अफसरों से एसएसपी ने कहा कि मुलाजिमों की समस्या सुनें। हर समस्या का हल है। समग्र माहौल बना कर चलना है, कोई दुश्मन नहीं है। यह हमारी फोर्स है। थाना प्रभारियों को भी यह आदेश दिए गए हैं कि फोर्स की देखभाल करें, क्योंकि जब तक फोर्स की देखभाल नहीं करेंगे, फोर्स काम नहीं करेगी। एसएसपी ने कहा कि मुलाजिम 12 से 14 घंटे तक काम करते हैं और परिवार को समय नहीं दे पाते। विभाग ही इनका परिवार है। बड़े अफसरों को सुविधाएं हैं लेकिन छोटे मुलाजिमों को नहीं। ऐसे में उनके बारे में सोचना पड़ेगा। उन्होंने डीएसपी स्तर के अफसरों को सप्ताह में एक बार कल्याणकारी बैठकें करने को कहा। एसएसपी ने कहा कि वह भी ऐसी बैठकों में शामिल होंगी। आगे कहा कि थाने में सप्ताह में एक बार मुलाजिमों को साथ बैठ खाना खाना चाहिए और अपनी बातें साझा करना चाहिए।
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