ज्ञानी इकबाल सिंह ने कहा कि कुछ पंथ विरोधी उनको जत्थेदार के पद से हटाने की साजिश रच रहें हैं। यह लोग तख्त श्री पटना साहिब जी की जमा 30 करोड़ की राशि हड़पना चाहतें है। उन्होंने बिहार के 200 से अधिक सिखों को ग्रंथि सिंह सजाया है। यह सिख पंज प्यारों की सेवा भी निभा रहे हैं।
ये मेरा नहीं श्री तख्त साहिब का विरोध कर रहे हैं। इस वर्ष प्रबंधक कमेटी में बदलाव हुआ है। उस बदलाव में शिकायत करने वाले कमिककर सिंह ग्रुप को भी पद नहीं मिला है। पटना साहिब की धार्मिक समागम की स्टेज पर भी कंट्रोल करना चाहता था।
श्री अकाल तख्त केवल कौमी मामलों पर करे विचार
ज्ञानी इकबाल सिंह ने कहा कि सिखों की सर्वोच्च अदालत श्री अकाल तख्त साहिब में केवल कौमी मामले ही विचार के लिए रखे जाने चाहिए। शेष सभी मामले एसजीपीसी की धर्म प्रचार कमेटी को देखने चाहिए। एसजीपीसी, तख्त श्री पटना साहिब व तख्त श्री हजूर साहिब के संविधान में जत्थेदार की कोई पोस्ट नहीं है।
जत्थेदार की सम्मानित पदवी शुरू से चली आ रही है। संविधान में मुख्य पुजारी की पोस्ट है। भविष्य में गुरुद्वारा प्रबंधन में कोई संशोधन होता है तो तख्त श्री पटना साहिब व श्री हजूर साहिब को भी उसी एक्ट के तहत लाया जा सकता है। सभी तख्त एक ही एक्ट के तहत आएंगे तो वह उसका स्वागत करते हैं।