पूर्वजों को श्रद्धासुमन अर्पित करने का वक्त है पितृपक्ष का श्राद्ध। जो श्रद्धा से किया जाए उसे श्राद्ध कहा जाता है। आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक के समय को श्राद्ध कहते हैं। यह कहना है सेक्टर-30 के भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का। उनके अनुसार धर्मशास्त्र कहते हैं कि पितरों को पिंड दान करने वाला गृहस्थ्य, दीर्घायु, यश प्राप्त करता है।
पितरों की कृपा से सब तरह की समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। पितृपक्ष में पितरों को आस रहती है कि हमारे पुत्र, पौत्र पिंड दान कर हमें संतुष्ट करेंगे। इसी आस से पितृलोक से पितर पृथ्वी पर आते हैं।
वहीं, सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर में पुजारी और देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष लाल बहादुर दुबे का कहना है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु पूर्णिमा को हो तो उसका श्राद्ध भाद्र शुक्ल पूर्णिमा को करना चाहिए। इसी दिन दादा-दादी, परदादी का भी श्राद्ध करना चाहिए।
श्राद्ध की तिथि
पूर्णिमा का श्राद्ध 8 सितंबर
प्रतिपदा का श्राद्ध 9 सितंबर
द्वितीया का श्राद्ध 10 सितंबर
तृतीया का श्राद्ध 11 सितंबर
चतुर्थी का श्राद्ध 12 सितंबर
पंचमी का श्राद्ध 13 सितंबर
षष्टी का श्राद्ध 14 सितंबर
सप्तमी का श्राद्ध 15 सितंबर
अष्टमी का श्राद्ध 16 सितंबर
नवमी का श्राद्ध 17 सितंबर
दशमी का श्राद्ध 18 सितंबर
एकादशी का श्राद्ध 19 सितंबर
द्वादशी का श्राद्ध 20 सितंबर
त्रयोदशी का श्राद्ध 21 सितंबर
चतुर्दशी का श्राद्ध 22 सितंबर
अमावस्या का श्राद्ध 23 सितंबर
भरणी का श्राद्ध
13 सितंबर को पंचमी तिथि को दोपहर में भरणी नक्षत्र होने के कारण भरणी का श्राद्ध कहा जाता है। पंचमी का श्राद्ध बहुत शुभ माना जाता है।
मघा त्रयोदशी का श्राद्ध
सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री का कहना है कि 21 सितंबर को मघा नक्षत्र होने के कारण मघा त्रयोदशी का श्राद्ध कहते हैं। आश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी में पितृ श्राद्ध का बहुत महत्व है। त्रयोदशी के साथ मघा नक्षत्र हो तो इसका महत्व यह है कि यदि श्राद्ध किया जाए तो पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।
उनके अनुसार जिनकी जन्म कुंडली में पितृदोष के कारण घर परिवार और पति-पत्नी में क्लेश या अशांति हो तो वह शांत हो जाता है। इस दिन श्राद्ध करने से घर में सुख शांति रहती है।
अकाल मृत्यु वालों का श्राद्ध
सेक्टर-32 के प्राचीन श्री हनुमान मंदिर के पुजारी रवींद्र प्रसाद मिश्र और अभय चंद झा के अनुसार वाहन दुर्घटना, सांप के काटने से, विष के खाने से, अकाल मृत्यु के कारण जिसकी मृत्यु हुई हो उसका श्राद्ध चतुर्दशी को करना चाहिए।
चतुर्दशी में मरने वालों का श्राद्ध चतुर्दशी में नहीं करना चाहिए। इसका श्राद्ध त्रयोदशी या अमावस्या को करना चाहिए। जिन्हें मृत्यु की तिथि का ज्ञान न हो उसका श्राद्ध अमावस्या को करना चाहिए।
पंचवली का विशेष महत्व
बीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार श्राद्ध में पिंड दान और तर्पण, पंचवली के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। पंचवली के बिना श्राद्ध पूर्ण नहीं होता।
ये है पंचवली का तरीका
- गौ को पश्चिम दिशा में मुख करके पत्ते पर देना चाहिए
- कुत्ते को जमीन पर
- कौवे को पृथ्वी पर
- देवता मनुष्य, यक्ष आदि को पत्ते पर
- चींटियों को पत्ते पर देना चाहिए