श्राद्ध चल रहे हैं और अगर आपको अपने दिवंगत पितरों का आशीर्वाद चाहिए तो अपनों को मान सम्मान दीजिए व उनका ख्याल रखिए। पितृपक्ष में पितरों के श्राद्ध और तर्पण के लिए तमाम जतन किये जाते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जो जीते जी अपनों को असहाय और बेसहारा छोड़ देते हैं। सब कुछ होते हुए भी वे दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो जाते हैं। सही मायने में इन अपनों की सेवा में ही मोक्ष और मुक्ति का मार्ग छिपा है।
करनाल में इसे साकार कर रहा है अपना आशियाना, जहां इस तरह के असहाय और जरूरतमंदों को ना सिर्फ शरण दी जा रही है, बल्कि उन्हें हर संभव सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। पितृ पक्ष बुधवार से शुरू हो रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ अमावस्या को धरती पर आने वाले पितरों को विदाई दी जाती है। यह पूरा पखवाड़ा देहावसान कर चुके पितरों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का है, यह भी कहा जाता है कि अमावस्या को गरीबों को भोजन कराने, दान पुण्य करने से पितरों को शांति मिलती है।
लेकिन इससे इतर ऐसे भी कई बांगवा हैं, जिन्हें जीवित रहते हुए अपनों ने ठुकरा दिया है। वह भूख प्यास से तड़पते हुए जख्मी हालत में दर दर भटक रहे हैं, ना रहने को छत है और खाने की कोई व्यवस्था। कोई बीमारी से तड़प रहा है तो कोई अंगों में कीड़े पड़ जाने से बिलबिला रहा है, लेकिन साधन संपन्न परिवार होने के बावजूद उनकी कोई सुधि लेने वाला नहीं है। दिवंगत हो चुके पूर्वजों के लिए श्राद्ध और तर्पण करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करने वाले परिजनों के लिए यह मिसाल है कि यदि जीवित रहते ही उनके दुख दर्द का ख्याल रखा जाए।
करनाल के अपना आशियाना में इन दिनों 93 बेसहारा, लाचार लोग एक परिवार की तरह रहते हैं। यहां उनकी अलग दुनिया है। किसी के सिर में कीड़े पड़े थे तो किसी के पैर में, लेकिन अब हर दिन उन्हें स्नान आदि कराकर नियमित मरहम पट्टी, समय पर दवाइयां, भोजन, नाश्ता, धुले हुए कपड़े, स्वच्छ बिस्तर आदि मिल रहे हैं। वहीं परिजनों ने उन्हें जीवित होते हुए भी मृत मानकर सारे रिश्ते नाते तोड़ लिए हैं।