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हजारों लोगों को झटका: कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट, दिल्ली की तर्ज पर नीड बेस चेंज लागू करने से इंकार

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चंडीगढ़। दिल्ली की तर्ज पर चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के मकानों में जरूरत के मुताबिक बदलाव (नीड बेस्ड चेंज) पर राहत की उम्मीद कर रहे 65 हजार आवंटियों को तगड़ा झटका लगा है। इस मामले में सीएचबी की तरफ से गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में देश की राजधानी की तर्ज पर सीएचबी के मकानों में जरूरत के मुताबिक बदलाव को लागू करने से इंकार कर दिया है।
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सीएचबी के मकानों में जरूरत के मुताबिक बदलाव (नीड बेस्ड चेंज) को नियमित करने के लिए सीएचबी क्या तरीका अपनाए, यह समाधान ढूंढने के लिए सीएचबी ने इस कमेटी का गठन किया था। सीएचबी के सचिव इस कमेटी के चेयरमैन हैं और आरडब्ल्यूए व अन्य हितधारकों को भी कमेटी में नामित किया गया है। कई बैठकों व लोगों से चर्चा के बाद रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चहारदीवारी (बाउंड्री) के अंदर 100 प्रतिशत बदलाव को नियमित नहीं किया जा सकता क्योंकि मकानों में लाइट, वेंटिलेशन, एरिया जोनिंग, स्ट्रीट पिक्चर और स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी का भी ध्यान रखना जरूरी है।
अब 26 जुलाई को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में इस रिपोर्ट पर आखिरी फैसला लिया जाएगा। इंडिपेंडेंट डायरेक्टर हितेश पुरी ने बताया कि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है और अब बोर्ड की बैठक में इसे अंतिम फैसले के लिए लाया जा रहा है। नॉन ऑफिशियल सदस्यों की तरफ से की गई मांग के अनुसार 150 स्क्वायर फुट के अतिरिक्त कमरे और वॉशरूम को मंजूरी दी जानी चाहिए। अगर ये निर्माण 150 स्क्वायर फुट के एरिया से अधिक है तो उसे भी गिराया नहीं जाना चाहिए जबकि उनका कानूनी अधिकार नहीं देने का प्रावधान किया जा सकता है।
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चंडीगढ़ एक योजनाबद्ध शहर, दिल्ली ने नहीं कर सकते तुलना
कमेटी के अनुसार चंडीगढ़ एक योजनाबद्ध शहर है, जिसकी तुलना दिल्ली के साथ नहीं की जा सकती है। चंडीगढ़ में भूकंप की अधिक संभावना रहती है, जिसके चलते इस तरह के बदलाव सार्वजनिक संपत्ति व मानव जीवन के लिए खतरा हो सकते हैं। फ्लोर एरिया रेश्यो व मास्टर प्लान के अंदर तय नियमों से बाहर बदलाव करने के लिए गृह मंत्रालय की मंजूरी जरूरी है। पिछले काफी समय से 65 हजार के करीब सीएचबी अलॉटी मकानों में बदलाव की मांग कर रहे हैं। हालांकि कमेटी ने पुराने नीड बेस्ड चेंज में कुछ बदलाव करके लोगों को मामूली राहत भी दी है। दूसरी तरफ बोर्ड के नॉन ऑफिशियल सदस्यों ने तीन चरणों में बदलाव नियमित करने की प्रक्रिया लागू करने की मांग की है। उनके सुझावों पर अब बोर्ड की बैठक में चर्चा की जाएगी।
कमेटी की तरफ से की गई सिफारिशें
- घरों में टाइल कार्य की अनुमति इस शर्त पर दी जाएगी कि भवन बिल्डिंग लाइन के भीतर है और 9 इंच की आम दीवार को कमांड बैंड के रूप में छोड़ दिया जाना चाहिए
- लिफ्ट के निर्माण के लिए ब्लॉक के सभी आवंटियों की सहमति प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए
- सीएचबी के घरों में सामने की ईंट की चहारदीवारी को स्लाइडिंग गेट के साथ बदला जा सकता है
- ब्लॉक के सभी आवंटियों की सहमति के अधीन आवंटियों की तरफ से छत पर सौर पैनल स्थापित किए जा सकते हैं लेकिन इसके लिए स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी का सर्टिफिकेट जरूरी होगा
- इंडिपेंडेंट घरों में 115 एमएम (4 इंच) से अधिक मोटी दीवार को हटाने की अनुमति दी जाएगी, पर स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी का सर्टिफिकेट देना होगा
- बिल्डिंग की बाहर सतह पर पेंट के लिए एक ब्लॉक में सभी मंजिलों के मालिकों की आपसी सहमति की आवश्यकता न हो
- इंडिपेंडेंट घरों में सीएचबी सीबीआर (शहरी) 2017 के प्रावधानों का पालन कर सकता है जो कि मरला घरों के बराबर प्लॉट किए गए हैं, जैसा कि चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा पहले से ही पालन किया जा रहा है। सीबीआर 2017 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बाद पैनल आर्किटेक्ट सेल्फ सर्टिफिकेशन योजना के तहत योजनाओं को प्रमाणित कर सकते हैं। हालांकि आवंटियों को निर्धारित फॉमूर्ले के अनुसार अतिरिक्त एफएआर के लिए शुल्क जमा करना होगा
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- स्टैंडर्ड ड्राइंग को वेबसाइट से बिना चार्ज के डाउनलोड करने की अनुमति हो
- केवल फ्लैटों के मुख्य आंतरिक प्रवेश भाग पर टाइल कार्य की अनुमति
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