चंडीगढ़ के महत्वपूर्ण फिल्म सिटी प्रोजेक्ट के मामले में फिल्म निदेशक सतीश कौशिक को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने तगड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन के उस कदम को सही ठहराया है, जिसके तहत प्रोजेक्ट के लिए जमीन की अग्रिम राशि जब्त की गई थी। अब सतीश कौशिक की 47 करोड़ 25 लाख की राशि जब्त ही रहेगी। इसके साथ ही प्रशासन के कंधे से करीब एक सौ करोड़ की जिम्मेदारी भी हट गई है।
यूटी प्रशासन ने फिल्म सिटी स्थापित करने के लिए सारंगपुर में 30 एकड़ जमीन सतीश कौशिक की कंपनी को अलॉट की थी। जमीन की कीमत की तय फीसद राशि 47.25 करोड़ रुपये बनती थी। कौशिक ने यह राशि जमा करवा दी थी। हालांकि कौशिक को जमीन पर कब्जा नहीं दिया गया था। इस वजह से अलॉटमेंट के करीब छह महीने बाद कौशिक ने प्रोजेक्ट रद्द कर दिया और प्रशासन से अपनी अदा राशि मांगी। प्रोजेक्ट छोड़ने के कारण प्रशासन ने राशि जब्त कर ली थी, जिसे कौशिक ने आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में अर्जी दाखिल कर चुनौती दी थी। उन्होंने यह राशि 24 प्रतिशत ब्याज समेत मांगी।
पूर्व में कौशिक के हक में हो चुका है फैसला: आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल ने कौशिक के हक में फैसला देते हुए प्रशासन को निर्देश दिया था कि कौशिक की राशि ब्याज समेत लौटाई जाए। इस आदेश को प्रशासन ने डीसी के समक्ष चुनौती दी, लेकिन डीसी ने ट्रिब्यूनल का फैसला बरकरार रखा।
कब्जा दिलाने में देरी पर कौशिक की कंपनी को दी गई थी किस्तों में छूट : डीसी के फैसले के खिलाफ प्रशासन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। प्रशासन की ओर से पेश हुए वकील संजीव शर्मा और शेखर वर्मा ने पैरवी करते हुए हाईकोर्ट का ध्यान आकर्षित किया था कि जमीन पर कब्जा दिलाने में देरी पर कौशिक की कंपनी को अगली किस्तों में छूट दे दी गई थी। जब जमीन का कब्जा देने की बारी आई तो कौशिक ने यह प्रोजेक्ट खुद छोड़ा, न कि प्रशासन ने यह प्रोजेक्ट रद्द किया था।
इन दलीलों के साथ प्रशासन ने 47 करोड़ 25 लाख की राशि जब्त करने को नियमानुसार और प्रोजेक्ट की शर्तों के मुताबिक सही करार दिया। साथ ही ट्रिब्यूनल व डीसी का फैसला रद्द करने की मांग की। हाईकोर्ट ने प्रशासन की ओर से राशि जब्त करने की कार्रवाई को सही ठहराया। इस वक्त यदि प्रशासन को पैसे लौटाने होते तो यह राशि एक सौ करोड़ के करीब बनती है, लेकिन फैसला हक में आने पर अब प्रशासन इस बड़ी जिम्मेदारी से मुक्त हो गया है।