फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राजनीति : किसान आंदोलन को अपने पक्ष में भुनाने की रणनीति बना रहा शिरोमणि अकाली दल 

Fri, 11 Dec 2020 12:31 PM IST
निवेदिता शर्मा अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब)
विज्ञापन
प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर बादल। - फोटो : फाइल फोटो
विज्ञापन

दिल्ली-हरियाणा बार्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में पंजाब सबसे बड़ा योगदान दे रहा है। पंजाब का प्रमुख राजनीतिक दल शिरोमणि अकाली दल इस आंदोलन को अपने पक्ष में भुनाने की रणनीति तैयार कर रहा है। इसके लिए पार्टी के संरक्षक और पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके प्रकाश सिंह बादल सक्रिय भूमिका में आ गए हैं। 

विज्ञापन


पंजाब में पिछले विधानसभा चुनाव से अपना पंथक जनाधार खो चुका शिरोमणि अकाली दल (बादल) किसान आंदोलन को सिख संघर्ष का रूप देने के लिए फिर से राज्यों को अधिक अधिकार देने के पुराने एजेंडे पर चल पड़ा है। इन दिनों मोदी सरकार के खिलाफ पंथक वोट में आए उबाल को शिअद के पक्ष में मोड़ने की रणनीति के तहत ही पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने पद्म विभूषण लौटने की घोषणा की।

वहीं शिअद के सीनियर नेताओं को मोदी विरोधी नेताओं से मुलाकात करने के लिए भेजना, इस बात का संकेत है कि प्रकाश सिंह बादल विधान सभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बैठाने के लिए सक्रिय हो गए हैं।
विज्ञापन


कुछ दिन पहले शिअद के पूर्व सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा और अन्य अकाली नेताओं ने एनडीए की पूर्व सहयोगी शिवसेना के मुखिया व महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का दरवाजा खटखटाकर किसानों के आंदोलन के लिए सहयोग मांगा। यह शिअद के राज्यों को अधिकार देने के अपने पुराने एजेंडे पर वापस लौटने के संकेत भी हैं। शिअद राज्यों को अधिक अधिकार देने के मुद्दे पर भाजपा विरोधी दलों को एक प्लेटफार्म में इकट्ठा कर मोदी सरकार के विरुद्ध नया मोर्चा शुरू करने की ताक में है। 
 

विज्ञापन

किसान संघर्ष ने शिअद को दिया मौका 

शिअद की सियासत सदा केंद्र सरकार के विरोध के आसपास घूमती रही है। 1997 में पंजाब के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिलने और भाजपा के साथ हुए राजनीतिक समझौते के बाद अकाली दल के संघर्ष की धार सत्ता ने कुंद कर दी थी। लेकिन किसान संघर्ष ने शिअद को 23 वर्ष बाद एक बार फिर केंद्र से संघर्ष करने का मौका दिया है।

अपनी पंथक शक्ति गंवा चुके शिअद को हालांकि अब तक किसान संघर्ष का कोई भी सियासी लाभ नहीं मिला है। पंथक वोट बैंक में शामिल किसानों को अपने पाले में लाने के लिए बादल ने पद्म विभूषण वापस करने की घोषणा की, लेकिन इससे भी शिअद को कोई भी पंथक सहानुभूति नहीं मिली।


शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) अध्यक्ष बीबी जागीर कौर की पंथक छवि को शिअद के पक्ष में भुनाने के लिए कवायद शुरू की है। इसके तहत भारत बंद की कॉल को एसजीपीसी ने पूरा दिया और सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के हजूरी रागी सिंहों ने भी किसान आंदोलन के समर्थन करने की घोषणा की। शिअद सिखों की धार्मिक शख्सियतों के माध्यम से इस आंदोलन को सिख संघर्ष के साथ जोड़ने की रणनीति पर काम करता दिख रहा है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें