अपनी जिंदगी की सियासी पारी उन्होंने 1985 में शुरू की और अकाली सरकार में खन्ना के विधायक बने। 1998 से लेकर 2004 तक राज्यसभा सदस्य रहे। इसके बाद 2004 में अकाली दल की तरफ से रोपड़ के सांसद बने। लिबड़ा 2009 में कांग्रेस की टिकट पर फतेहगढ़ साहिब से सांसद बने।
कांग्रेस से सांसद बनने से पहले सुखदेव सिंह लिबड़ा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार के समय देश हित में परमाणु समझौते पर बतौर सांसद अनुपस्थिति दर्ज करवाई थी जिसका श्रेय कांग्रेस को मिला था।
2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान तीन अप्रैल 2014 को सुखदेव सिंह लिबड़ा ने पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की उपस्थिति में पार्टी दफ्तर चंडीगढ़ में दोबारा अकाली दल की सदस्यता हासिल की।
सुखदेव सिंह लिबड़ा के घर दुख बांटने पहुंचे पूर्व अकाली मंत्री हरमेल सिंह टोहड़ा ने कहा कि लिबड़ा मेरे पिता गुरचरन सिंह टोहड़ा के बहुत नजदीकी थे और उन्होंने पार्टी के लिए बढ़ चढ़कर काम किया।
सुखदेव सिंह लिबड़ा अपने कर्मठ एवं तेज तर्रार राजनीति और काम करने में विश्वास रखने के नेता के तौर भी जाने जाते थे। बढ़ती उम्र में भी वह अपनी सांसद निधि की ग्रांट को गांवों में बांटने के लिए तत्पर रहते थे। उन्होंने 2009 में खन्ना रेलवे स्टेशन पर दो सुपर फास्ट गाड़ियों सचखंड एक्सप्रेस और शान-ए-पंजाब गाड़ियों का ठहराव करवाया था।
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पूर्व सांसद सुखदेव सिंह लिबड़ा के देहांत पर गहरा दुख प्रकट किया है। सुखदेव सिंह लिबड़ा 87 वर्ष के थे। शुक्रवार सुबह खन्ना के एक निजी अस्पताल में उन्होंने आखिरी साँस ली। शोक संदेश में मुख्यमंत्री ने सुखदेव सिंह लिबड़ा को उसूलों और सिद्धांतों की राजनीति करने वाला नेता बताया, जो लोगों के साथ ज़मीनी स्तर पर जुड़े हुए थे।
उन्होंने कहा कि लिबड़ा के चले जाने से राज्य एक दरवेश सिख राजनीतिज्ञ से वंचित हो गया। उन्होंने कहा कि लिबड़ा ने पद की परवाह किए बिना हमेशा उसूलों का निर्वहन किया। कैप्टन ने परमात्मा के समक्ष दिवंगत नेता की आत्मिक शांति और उनके पारिवारिक सदस्यों और सगे-संबंधियों को ईश्वरीय आदेश मानने का बल प्रदान करने की अरदास की।